Thursday, May 16, 2024

सी यू ई टी (CUET) और बोर्ड परीक्षा का बोझ कब निकलेगा।

मेरा देश कहाँ जा रहा है। आँखें खोल के देखो। 

सी यू ई टी ( CUET) के रूप में सरकार का यह बहुत बड़ा नकारा कदम साबित होने वाला है। इस निर्णय के रूप में सरकार या तो स्कूली शिक्षा पर विश्वास नही कर पा रही है या विद्यार्थियों से भी पैंसे उगाई की एक एक स्किम बना रही है। समझ नही आ रहा यहाँ पर बोर्ड परीक्षा परिणाम के बाद आखिर सी यू ई टी की क्या जरूरत थी। इस से बच्चों पर एक नया बोझ बढ़ा है। इससे अच्छा होता कॉलेजों की संख्या बढ़ाती। ये तो उस विद्यार्थी के स्किल पर शक करने जैसी बात हो गयी जो पूरे साल मेहनत कर के अपनी बोर्ड परीक्षा को पास करता है। या देश के बाहरवीं बोर्ड परीक्षा के सिलेबस पर सवाल है। यदि स्किल ही मेजर करना था तो एक दिन की 2 घंटे की परीक्षा से भी विद्यार्थी का स्किल मेजर किया जा सकता था।  युवाओं के लिए ये वैरियर क्यों लगाये जा रहे हैं। सरकार को इस तरह के सुवाव देनी वाली संस्थाओं का भी मूल्यांकन होना जरूरी है। काश हर युवा इन पद्धतियों को सोच और समझ रहा होता? 

हर माता-पिता के चेहरों पर सी यू ई टी परीक्षा स्थल पर एक मायूसी थी जबकि उनका बच्चा सरकार द्वारा संगठित बोर्ड के नियमों के अनुरूप परीक्षा देकर अपनी स्किलता का अच्छा आधार प्रमाणित कर चुका था फिर क्या जरूरत थी ?

यह कोई अच्छा नजरिया नही है कॉलेजों में प्रवेश पाने का बल्कि विद्यार्थियों के स्किल पर उंगली उठाना जैंसा कदम है। इस विषय प्रदेश को बुद्धिजीवी भी सायद अभी तक अनजान ही हैं या किसी ने सोचा नही है जब एक उसी स्टैण्डर्ड की परीक्षा को विद्यार्थी पास कर चुका है तो फिर यह क्यों ? 

कुछ लोगों की अलग राय हो सकती है कॉलेजों में प्रवेश को लेकर लेकिन जब वो लोग भी गहराई में जाकर सोचेंगे तो उनको भी परिणाम यही दिखेंगे। 

स्किल इंडिया क्या यही है कि युवाओं को इस तरह की पतिक्षाओं में उलझा कर रख दो ताकि वो परीक्षाओं एवं परिणामों तक ही सीमित रहें। ये मेरा अपना मत है , सी यू ई टी की परीक्षाओं से लेकर बच्चों की हताश तक आज देखने को मिली है। लगता है हमारी सरकारें स्वास्थ्य एवं आधारभूत शिक्षा देने में पिछड़ रही है। बाकी रोजगार की तो बात ही क्या की जाय। लगता है सरकार के पास देश के युवाओं के लिए शिक्षा की उचित व्यवस्थाएँ नही हैं इस लिए जाने अनजाने में इन हथकंडों को अपनाया जा रहा है। यह एक बहुत बड़ा भ्रमजाल हो सकता है आशा है इन मुद्दों को लेकर कानून का कोई अच्छा जानकार कोर्ट में जनहित याचिका जरूर लगाए ताकि लाखों युवाओं के भविष्य एवं देश की शिक्षा पद्धति और अभिभावकों के साथ युवाओं के स्किल का सम्मान रखा जाये। बच्चों को अपने अनुकूल विषय बस्तु चुनने का अधिकार मिलना जरूरी है। क्या यही व्यवस्था भारत को विश्व गुरु बनायेगी? 



Sunday, July 30, 2023

मशरूम (च्युं): एक प्राकृतिक उपज और औषधीय खजाना

मशरूम, जिसे कई पहाड़ी क्षेत्रों में "च्युं" कहा जाता है, एक प्रकार का फफूंद (fungus) होता है जो नमी और जैविक अपघटन वाली जगहों पर प्राकृतिक रूप से उगता है। यह न केवल एक स्वादिष्ट खाद्य पदार्थ है, बल्कि इसके कई औषधीय और पोषण संबंधी लाभ भी हैं, विशेषकर आयुर्वेद में इसका विशेष महत्व है।
🌿 मशरूम (च्युं) के महत्वपूर्ण गुण पोषण से भरपूर:
मशरूम में प्रोटीन, फाइबर, विटामिन B, D, सेलेनियम, पोटैशियम, तांबा, और आयरन प्रचुर मात्रा में होते हैं। कम कैलोरी और वसा रहित:
यह वजन कम करने वाले लोगों के लिए उत्तम आहार है। एंटीऑक्सिडेंट से भरपूर:
इसमें ergothioneine और glutathione जैसे तत्व पाए जाते हैं जो शरीर में कोशिकाओं को फ्री रेडिकल्स से बचाते हैं। प्रतिरक्षा शक्ति बढ़ाना:
मशरूम शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाता है और वायरल संक्रमण से बचाता है। एंटी-कैंसर गुण:
कुछ शोध बताते हैं कि मशरूम में पाए जाने वाले बायोएक्टिव कंपाउंड्स कुछ प्रकार के कैंसर की संभावना को कम करते हैं। डायबिटीज़ में सहायक:
इसमें ग्लाइसेमिक इंडेक्स कम होता है, जिससे यह मधुमेह रोगियों के लिए लाभकारी होता है। 🌱 पहाड़ी क्षेत्रों में मशरूम (च्युं) का प्राकृतिक रूप से उगना
पहाड़ी क्षेत्रों जैसे उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश, नेपाल, सिक्किम और पूर्वोत्तर भारत में मशरूम वर्षा ऋतु (मानसून) में अधिक मात्रा में उगते हैं। ये मुख्यतः जंगलों, बगीचों, कटी लकड़ियों, नमी भरे स्थानों और गिरी हुई पत्तियों पर प्राकृतिक रूप से उत्पन्न होते हैं। उगने की प्रक्रिया: नमी और तापमान:
मशरूम को उगने के लिए उच्च आर्द्रता और 20–30°C तापमान की आवश्यकता होती है। बायोडीकम्पोज़िशन:
पुराने पत्ते, लकड़ियाँ, गाय/भैंस का गोबर आदि जब सड़ते हैं, तो उनसे खाद बनती है जो मशरूम की वृद्धि को पोषण देती है। बीजाणु (Spores):
मशरूम के बीजाणु हवा में फैलते हैं और जब उपयुक्त वातावरण मिलता है, तो वे अंकुरित होकर मशरूम का निर्माण करते हैं। 🍄 मशरूम (च्युं) के प्रकार (पहाड़ी क्षेत्रों में पाए जाने वाले)
गुच्छी (Morchella):
दुर्लभ और अत्यधिक महंगी प्रजाति, जो हिमालयी क्षेत्रों में स्वाभाविक रूप से उगती है। दूधी च्युं (Milky Mushroom)
भूरे च्युं (Button Mushroom)
सफेद मशरूम (Oyster Mushroom)
सावधानी
सभी मशरूम खाने योग्य नहीं होते। जंगलों में उगने वाले कुछ मशरूम जहरीले होते हैं और पहचान में कठिन होते हैं। इसलिए केवल अनुभवी व्यक्ति द्वारा पहचाने गए मशरूम का ही सेवन करें।

Sunday, June 18, 2023

उत्तराखंड के फल-फूल

तिमला (Timla) तिमला (Timla) जिसे संस्कृत में काकोदुम्बर और अंग्रेजी में Wild Fig या Ficus Palmata कहा जाता है — एक प्राचीन, औषधीय और पोषण से भरपूर जंगली फल है, जो विशेषकर भारत के हिमालयी और उपहिमालयी क्षेत्रों में प्राकृतिक रूप से उगता है।
तिमला (Timla) क्या है? वर्ग: यह अंजीर (Fig) परिवार का एक जंगली फल है।
प्राकृतिक रूप से उगता है: यह उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश, नेपाल, जम्मू-कश्मीर और पूर्वोत्तर भारत के पहाड़ी इलाकों में पाया जाता है। वृक्ष: इसका पेड़ मध्यम आकार का होता है और इसकी पत्तियाँ बड़ी और गहरी होती हैं। फल छोटे, गोल और बाहर से हरे या बैंगनी रंग के होते हैं।
तिमला के पोषक तत्व
तिमला में प्राकृतिक रूप से पाए जाते हैं: फाइबर विटामिन A, C और K कैल्शियम, पोटैशियम, आयरन एंटीऑक्सिडेंट और एंटीबैक्टीरियल तत्व
तिमला (Timla) के आयुर्वेदिक और औषधीय लाभ पाचन शक्ति बढ़ाता है तिमला में उच्च मात्रा में फाइबर होता है, जो कब्ज को दूर करता है और आँतों की क्रियाशीलता सुधारता है। डायबिटीज़ में सहायक इसके फलों और पत्तों का काढ़ा रक्त शर्करा नियंत्रित करने में सहायक होता है। हृदय स्वास्थ्य के लिए लाभकारी यह कोलेस्ट्रॉल कम करने में मदद करता है और रक्त परिसंचरण सुधरता है। त्वचा रोगों में उपयोगी आयुर्वेद में तिमला को त्वचा संक्रमण, खुजली और फोड़े-फुंसी के उपचार में उपयोग किया जाता है। गले और श्वसन तंत्र के लिए लाभकारी इसके पके फलों का सेवन गले की खराश, खांसी और ब्रोंकाइटिस जैसी समस्याओं में लाभ देता है। दूध उत्पादन में सहायक (स्तनपान कराने वाली माताओं के लिए) पारंपरिक ज्ञान में इसे दूध की मात्रा बढ़ाने में उपयोगी माना जाता है।
पहाड़ी क्षेत्रों में तिमला का महत्त्व
स्वस्थ पारिस्थितिकी तंत्र का हिस्सा: तिमला के पेड़ पशु-पक्षियों के लिए भी भोजन और आश्रय प्रदान करते हैं, विशेषकर बंदर, चिड़ियाँ और मधुमक्खियाँ इसके फल व रस का सेवन करती हैं। स्थानीय चिकित्सा में प्रयोग: ग्रामीण और पहाड़ी समुदाय इसका उपयोग पारंपरिक घरेलू उपचारों में करते हैं। कुपोषण के विरुद्ध प्राकृतिक विकल्प: यह प्राकृतिक सुपरफूड पहाड़ी ग्रामीणों के लिए आवश्यक पोषण उपलब्ध कराता है, विशेषकर उन इलाकों में जहाँ आधुनिक चिकित्सा या पैकेज्ड फूड आसानी से नहीं पहुँचते।
तिमला का उपयोग कैसे करें?
फल के रूप में ताजा खाएं सूखा कर पाउडर या औषधि के रूप में उपयोग करें पत्तों का काढ़ा या रस बनाएं घरेलू नुस्खों में उपयोग करें (त्वचा, पेट या खांसी के लिए) सावधानी
अधिक मात्रा में सेवन करने से कभी-कभी दस्त या पेट में गैस हो सकती है। यदि आप एलर्जी प्रवृत्ति के हैं तो पहले थोड़ी मात्रा से शुरू करें।




आम (Aam)


सेब (Seb) Apple


आरु (आडू) Aadu


शहतूत (Shahtut)


मोलू (Mili)

बुराँस का पेड़ (Burans)

काफल का पेड़ (Kaafal)


काफल



घिंगारु ( Ghingaaru)

लिंगाड़े


रत्ता दाणी



ढादु





Saturday, April 15, 2023

मालू के पत्तलों एवं डोने (Maalu Done Pattal)

यदि आप गूगल, फेसबुक या सोशियल मीडिया के अन्य प्लेटफॉमों का उचित उपयोग करते हैं तो क्या नही मिल सकता है। बस मन में सदैव कुछ नया सीखने की चाह होनी चाहिए। गूगल या सोशियल मीडिया हर प्रकार से हमें सहायता मिलती है बशर्ते हम उन्हें उचित तरीकों से इस्तेमाल करना सीख जायें। आप सभी साथियों को यह जानकर हर्ष होगा कि विनोद घिल्डियाल जी कीर्तिनगर के मालूपाणी गाँव जिला टिहरी गढवल में मालू के पत्तल (प्लेट ) एवं डोने (कटोरियाँ ) एक समूह के साथ बना रहे हैं। अभी छोटी मात्रा में है उनका ये कारोबार, इसे आगे बढ़ाने हेतु जिला उधोग केंद्र से भी संपर्क साध रहे हैं।
आप सभी मालू के पत्तलों एवं डोने हेतु श्री विनोद जी से संपर्क कर सकते हैं। 
Vinod Ghildiyal ji +91 99271 46430

मुझे नही लगता है कि कभी उन्होंने गूगल की वर्ड सीखा होगा परंतु उनका की वर्ड से आज हर व्यक्ति उन तक आसानी से पहुँच सकता है। यदि डिजिटल का वास्तविक स्वरूप है। आप भी अपने उत्पाद एवं सर्विस को गूगल पर पंजीकृत (रजिस्टर्ड ) जरूर करें। 


मुझे उनका पता निम्न लिंक से प्राप्त हुआ

https://www.google.com/search?q=maalu+dona+pattal&hl=en-IN&authuser=1&ei=F6E6ZLTaPKvKseMPtISxyAs&oq=maalu+dona+pattal&gs_lcp=ChNtb2JpbGUtZ3dzLXdpei1zZXJwEAM6BAgeEAo6BQgAEKIESgQIQRgBUPQQWPEmYLItaABwAHgAgAGWAogBswmSAQUwLjQuMpgBAKABAcABAQ&sclient=mobile-gws-wiz-serp#trex=m_t:lcl_akp,rc_f:rln,rc_ludocids:13792938135258457118,ru_gwp:0%252C7,ru_lqi:ChFtYWFsdSBkb25hIHBhdHRhbEj2qKuG87mAgAhaIxAAEAEQAhgAGAEYAiIRbWFhbHUgZG9uYSBwYXR0YWwyAnRhkgEVZGlzcG9zYWJsZV9pdGVtc19zaG9wqgE6EAEqFSIRbWFhbHUgZG9uYSBwYXR0YWwoLjIfEAEiGx6oVYk2MCPLjuvaQsjiGw-891rJQlooXX6LsQ,trex_id:rkKUHe&lpg=cid:CgIgAQ%3D%3D

#मालू
#पत्तल
#डोने
#मालुकेपत्तल
#मालुकेपुडखे

Monday, October 10, 2022

खिड़कियाँ

आखिर तुम कब खोलोगे ?

खिड़कियाँ!
अपने मन मस्तिष्क की।

कानून, न्याय और अधिकार
सब पर आधिपत्य है तुम्हारा!

अपनी उलझनों पर तुम
चटकनियाँ चढ़ा के बैठे हो,
तुम्हारे हाथ मे कुछ नही
ये किस कंठ से कहते हो!

राम बनने की कोशिश में
हवा को छू लेते हो।
नाच रहा रावण मस्तिष्क पर
ये घूट कैसे पी लेते हो!

चाल दिख रही है हर एक को
ये कदमताल भी तुम्हारी ही है,
तुम जी रहे हों किस वहम में
ये लाचारी भी तुम्हारी ही है।

आखिर कब खोलोगे ?
खिड़कियाँ!
अपने मन-मस्तिष्क की। @- राजेन्द्र सिंह कुँवर 'फरियादी'

#राजनेता
#टूटतासमाज
#तड़फतीइंसानियत
#कुर्सियाँ
#चालाकियाँ




Sunday, April 17, 2022

आपके शौक

कब कहाँ और कैंसे यह अचानक लोगों के लिए प्रेरणा बन जायें यह कोई सोच भी नही सकता। आज दुनियाँ में लाखों उदाहरण भरे पड़े हैं। जिन लोगों ने अपने शौक को निरंतर रूप से आगे बढ़ाया है उनका शौक समाज के लिए प्रेरणा तो बन गया परन्तु उस शौक ने उनके साथ साथ हजारों लोगों की जिन्दगी ही बदल डाली। पैंसा एवं प्रतिष्ठा ये दो ही ही शब्द हैं जिनके लिए हर व्यक्ति पूरी जिन्दगी भर समय एवं सांसारिक भावनाओं का बोझ ढोता है। जो भी दुनियाँ में आता है इन दोनों शब्दों से खुद को न चाहाते हुये भी अलग नही कर सकता है। यह एक चमत्कार है। आज दुनियाँ के सामने करोड़ों रास्ते हैं इन दोनों तक कि पद यात्रा करने के लेकिन 99% लोग बीच में ही अपनी आशाएँ छोड़ देते हैं, इसमें सबसे बड़ी बाधा समाज का मार्गदर्शन। जितने भी लोग आज सफल हुये हैं उनका सफलता का एक ही राज है शौक, यदि वह अपने शौक का गला घोट देते तो सफलता नही मिलती। समाज की नजरें आपको तब तक रोकती हैं जब आप सफल नही बन जाते, आपके सफल बनते ही समाज का नजरिया स्वतः ही बदल जाता है। याद रखें जो सामाजिक जन आकांक्षाएँ आपके कदमों पर सरसरी नजरें गढ़ायें रहती हैं वही आपके सफल होते ही आपकी वाहवाही करने लगती हैं। किसी भी बड़े प्रतिष्ठित व्यक्ति की जीवनी  उठा कर देखें प्रत्यक्ष प्रमाण मिल जाता है। हम सब ये जानते हैं तो भी सफलता का प्रतिशत सदैव कम ही क्यों रहता है? इसका मुख्य कारण है 95% व्यक्ति व्यक्ति निरन्तरता से थक जाते हैं। यदि आप भी थक रहे हैं तो असफलता का दरवाजा आपका इंतजार कर रहा है।


Monday, February 21, 2022

जन्मजात योग्यता

लेखन और वाचन ऐंसे अद्भुत प्लेटफॉर्म हैं जो कि लाखों लोगों की मनो दशाओं को पुनर्जीवित कर लेते हैं मगर ये सब उस पर निर्भर होता है जो सुनता है या पढ़ता है। कुछ योग्यताएँ इंसान के अन्दर जन्मजात होती हैं। जरूरी नही सबसे ज्यादा अभ्यास करने वाला ही सफल होता है। अपने उन गुणों की पहिचान करना अत्यधिक जरूरी है। खुद को जाँचिए कहीं आप विपरीत दिशा की ओर तो नही जा रहे है। ऐंसा अक्सर इसलिए होता है कि हम लोग देखा देखी की दौड़ में खुद को पहिचान ही नही पाते हैं। अपने पड़ोसी, दोस्त या रिश्तेदार की देखादेखी में खुद की मिट्टी को पहिचान ही नही पाते हैं। साथ ही घरवालों के साथ साथ समाज का दबाव इतना अधिक होता है कि हम लोग न चाहाते हुये भी अपने जन्मजात प्रतिभा को कभी पहिचानने की कोशिश ही नही करते बस देखा देखी की हवा में बह कर अपने कैरियर को उलझा के रख देते हैं। अठारह वर्ष से अठाईस तीस कब निकल जाते हैं आज के युवा को मालूम ही नही पड़ता, जब तक वह खुद को देखने लायक होता है उसके जीवन पर डिग्रियों का भार बढ़ जाता है, कोई भी डिग्री या सर्टिफिकेशन किया है तो दूसरा रास्ता उसके लिए एक दीवार बन कर खडा हो जाता है वो अठाईस से लेकर तीस बत्तीस साल तक अपनी डिग्री को रास्ते पर ले जाने कि कोशिश करता है मगर अपनी लाईफ को कभी एनालाईज (Analyse) करने की कोशिश नही कर पाता इतने में भी सांसारिक रीति रिवाजों के बंधन भी घर वालों के कारण भार बनते चले जाते हैं और फिर एक बीमारी जिससे लोग तनाव कहते हैं घेर लेती है। हां कार्य कोई बड़ा या छोटा नही होता मगर उस कार्य को करने के लिए हमारे अन्दर जन्मजात योग्यता है कि नही यह जान लेना आज के समय मे अत्यधिक महत्वपूर्ण है। खासकर युवा साथियों को अपने कैरियर चुनते हुए खुद को जान लेना बहुत जरूरी है। उदाहरण भरपूर भरे पड़े हैं हर तीसरा व्यक्ति अच्छे पैंसे कमाकर या अच्छे सूट पहन कर आप लोगों को मोटिवेट कर रहा है और युवा ह्रदय अति शीघ्र मोटिवेट हो भी जाता है मगर क्या लाखों की पढ़ाई या मोटिवेशन ट्रेनिंग तुम्हें तुम्हारा अस्तित्व दे पायेगी या नही। कृपया देखा देखी में कभी भी अपने जीवन को न उलझाएं। हर तथ्य को पलट कर जरूर देखें आज के समय में जितनी बेरोजगारी बढ़ रही है उससे कई गुना तेजी से जॉब, व्यवसाय ये स्टार्टअप बढ़ रहे हैं। अपने जन्मजात गुण खंगालना शुरू करें। यदि आपके पास कोई अच्छा सर्टिफिकेशन, डिग्री या पद है तो उसको लगातार अपग्रेड करते रहें। यदि नही है तो भी खुद को आज के एवं आने वाले समय के अनुसार अपग्रेड करो। यदि आप अपनी डिग्री या डिप्लोमा या पद प्रतिष्ठा के कारण खुद के अपग्रेडेशन को रोक रहे हैं तो यह खुद के साथ एक धोखा है। 

Tuesday, February 1, 2022

जिंदगी हमें घसीट तो नही रही है ?

समय कहीं हमें घसीट तो नही रहा है?

दुनियाँ का हर व्यक्ति खुद के लिए चतुर होता है, आज हर  तीसरा व्यक्ति अच्छा पढ़ा लिखा है, हर छोर पर अच्छी जॉब भी है और अच्छा व्यवसाय भी साथ ही साथ रिस्क लेने की क्षमताओं में भी इजाफा हुआ है। पैंसा एवं पारिवारिक पृष्ठभूमि बहुत कुछ है मगर सब कुछ नही यदि आज अपने चारों ओर नजर उठा के देखते हैं तो हर ओर एक नया स्टार्टअप नजर आ जायेगा। चाहे वो ट्रैवलिंग से सम्बंधित हो, खाने से सम्बंधित हो, फाईनेंस से सम्बंधित हो, दुकान या मॉल से सम्बंधित हो, पढ़ाई से सम्बंधित हो,लेखन से सम्बंधित हो,मंच से सम्बंधित हो, स्कूल या कालेज से संबंधित हो या तकनीकी डिग्री या सर्टिफिकेशन से सम्बंधित हो या राजनीति से सम्बंधित हो। लगभग हर क्षेत्र में नये नये लोगों ने परिचम लहराया है। मगर ये भी सच है कि अधिकांश मुँह लटकाये बैठे हैं उन्हें तनाव के साथ साथ अपनी शैक्षिक डिग्रियों ने घेर कर रख दिया है और जॉब के लिए दर-दर भटक रहे हैं। इसमे न तो उनकी गलती है और न ही उनके घर वालों की बल्कि एक तरफ दौडती हुई दुनियाँ की गलती है। लोग सब कुछ जान कर भी जॉब के लिए उतावले हो जाते हैं और जब अपनी शैक्षिक योग्यता के अनुरूप पारिश्रमिक नही खोज पाते हैं तो तनाव ने जीने लगते हैं या अपनी आकांक्षाओं को वहीं पर खत्म कर लेते हैं, या अपने अनुभव को अपने मन मस्तिष्क पर बोझ बना कर खुद से कम्प्रोमाइज की जिंदगी जीने लगते हैं। यदि आप भी इस जीवन के चक्र में फंसे घुट रहे हैं तो अपने स्किल्स को डेवेलॉप कीजिए साथ ही सकारात्मक रुख से आगे कदम बढ़ाने की चेष्ठा कीजिए। रास्ता है और जरूर मिलेगा धौर्य धारण कीजिए। मैं कोई मोटिवेशन ट्रेनर नही हूँ और न ही किसी को भ्रमित करने हेतु लिखता हूँ। यह सब मेरा अनुभव है। मेरे जैसे कई लोग होंगे जो आगे बढ़ना चाहाते हैं मगर उन्हें उनकी परिस्थितियां रोक रही हैं। लेकिन ये भी सच है कि उन्हें उनके स्किल्स मालूम नही होंगे क्योंकि हमारी स्कूली शिक्षा हमें वो सब नही सीखाती हो जीवन को व्यवहारिक बना पाये,आज हमारे देश को स्वतंत्र हुये वर्षों हो चुके हैं मगर देश की अपनी मातृभाषा में कहीं भी 20 से 50 हजार या यूँ कहें लो प्रोफाईल वाली जॉब के लिए इन्टरव्यू का प्रथम गंतव्य अँग्रेजी से ही शुरू होता है। लेकिन कितने प्रतिशत लोग अँग्रेजी में परिपूर्ण हैं। देश का 70% तबका आज भी हिंदी ठीक नही बोल पता है। आप विश्लेषण खुद कीजिए  सब कुछ आपके सामने है।


#skillschallenge
#educationmatters
#lifechallenge
#Niesbud Skill Development Entrepreneurship
#entrepreneurmindset

Wednesday, January 5, 2022

हताशा एवं निराशा क्यों ?

मस्ताने बचपन से जब कोई भी व्यक्ति अपनी युवावस्था की ओर कदम बढ़ाता है तो लगभग अपनी शैक्षणिक उपलब्धियों को प्राप्त कर चुका होता है। मगर 90% युवा इस उपलब्धि के बाद कुछ हताश एवं निराश दिखने लगते हैं क्योंकि जिंदगी का मुख्य पडाव शुरू हो चुका होता है। कुछ अपनी शैक्षणिक क्षमताओं के आधार पर एवं कुछ अपनी जानपहिचान वालों की पहुँच के कारण अपने कैरियर को तराशना शुरू कर चुके होते हैं मगर अनुपात देखा जाय तो हताश एवं निराश की संख्या बहुत ज्यादा होती है। इनमें से भी 5 सालों के अन्दर कुछ अपनी पकड़ मजबूत कर के जिन्दगी की रफ्तार हिस्सा बन जाते है परन्तु अधिकांश इधर उधर भटकाव वाली जिन्दगी को लेकर तनाव का शिकार होकर या अपनी शैक्षिणक उपलब्धियों के कारण जीवन के साथ सामंजस्य स्थापित करने के लिए खुद से लड रहे होते हैं। मैं भी खुद इस अनुभव का हिस्सा बन चुका था मगर मेरा एटिट्यूड सदैव लर्निंग वाला रहा। कभी भी परिस्थितियों से हार नही माना। परिस्थितियों से लड़ना ही हर व्यक्ति के लिए महत्वपूर्ण है चाहे हो किसी भी आयुवर्ग का हो किसी भी समाज का हिस्सा हो। संपन्न हो या आर्थिक कमजोर। ऐंसा नही होता कि किसी संपन्न व्यक्ति को परिस्थितियां प्रभावित नही करती। हमारा मकसद हर उस युवा को एक व्यवस्थित जीवन यात्रा की ओर ले जाना है। यदि हमारी कहानी या जीवन यात्रा से किसी को मार्ग मिलता है प्रेरणा मिलती है या मोटिवेट होकर एक नये जीवन मार्ग का निर्माण निर्माण होता है तो इससे हमें कोई धन लाभ नही मिलेगा और न ही हमारे कार्यक्षेत्र में कोई प्रतिस्पर्धा उतपन्न होगी। मेरा मानना है कि हमारी प्रतिस्पर्धा स्वयं के कार्य, स्वयं के जीवन या स्वयं के संघर्षों से होती है। यदि कोई भी कार्य एक व्यक्ति कर सकता है तो दूसरा भी सुनिश्चित कर सकता है बशर्ते उस ओर बढ़ने के लिए मानसिक संतुलन एवं सीखने की उत्कंठा बहुत जरूरी है। आईये जीवन की इस संघर्षरत यात्रा को अपने कदमों एवं दुनियाँ के अनुभवों से जीतने की एक कोशिश करें। यदि ऐंसा कर पाते हैं तो सफलता सुनिश्चित है। आखिर शैक्षणिक उपलब्धियों के आधार पर  क्यों हम अपने जीवन को हताश एवं निराश बना के जीवन के साफर को संकुचित कर रहे हैं। शैक्षणिक उपलब्धियां हमारे जीवन को एक पथ पर ले जाने में सहायक हो सकती हैं जबकि उस पथ को प्रकाशित करने के लिए हमारा खुद के प्रति संकल्पित होना जरूरी है। हम मात्र अपनी शैक्षणिक उपलब्धियों के भरोसे ही सफलता प्राप्त नही कर सकते। हमें लगातार हो रहे जीवन मे व्यवहारिक बदलाओं को भी सीखना पडेगा तभी जीवन की यात्रा के संघर्ष को कुछ हद तक कंट्रोल किया जा सकता है। आप किसी भी उम्र के क्यों न हो बाजार के परिवर्तनों को पढ़े, सीखें एवं परिवर्तित हो रहे स्किल्स को अपनाए। यह प्रयास लगातार बना रहना चाहिए सफलता नही भी मिलेगी तो एक अच्छे रास्ते का आप निर्माण जरूर कर लेंगे। आज के समय मे जितना आलम बेरोजगारी को लेकर फैल रहा उससे कई गुना ज्यादा रोजगार सृजित हो रहे हैं खुद को तराशें, अपने इंटरेस्ट को भी आप अपना कैरियर बना सकते हैं, जीरो इन्वेस्टमेंट से व्यापारिक गतिविधियों में कदम रख सकते हैं, लेखन से लेकर इंजीनियरिंग तक का हर प्लेटफॉर्म हर जॉब हर व्यवसाय आज आपकी उस सोशियल साईट पर उपलब्ध है जहाँ पर आप हर दिन 3 से 5 घंटे का समय खर्च कर रहे हैं वो चाहे फेसबुक हो, व्हाट्सएप हो इंस्टाग्राम हो या ट्विटर इस सब का उपयोग आप अपने कैरियर को बनाने में यूज कर सकते हैं। आप यदि 10वीं या 12वीं भी है तो भी आप एम. बी. ए. या सॉफ्टवेर इंजीनियर के समक्ष खड़े हो सकते हैं। मात्र अंग्रेजी से मत डरिये यह एक सब्जेक्ट है। अंग्रेजी न बोल पाने या न लिख एवं न पढ़ पाने का जो अवरोधक मन मस्तिष्क मे विराजमान है उसे दूर किया जा सकता है। हां ये जरूर है कि अंग्रेजी बोलने या लिखने के कारण व्यक्ति थोड़ा ज्यादा कांफिडेंस लगता है मगर आप ये जान ले ऐंसा नही है उसको भी अपने कैरियर को व्यवस्थित करने के लिए उतना ही समय देना पड़ता है जितना एक अंग्रेजी न जानने ये समझने वाले को। हाँ यहाँ पर एक बात और स्पष्ट करना चाहता हूँ। हिंदी भी अपने आप मे एक व्यवसाहिक पहिचान बन चुकी है। बस एक संकल्प के साथ अपने कैरियर को आगे बढ़ाते रहें। सफलता के लिए यही एकमात्र बेसिक सिद्धान्त है। 

Sunday, December 12, 2021

शब्द

शब्द! रख लो कुछ मेरे, वक्त पर काम आयेंगे, कल मैं आऊँ या न आऊँ, ये सुबह शाम आयेंगे! शब्द! रख लो कुछ मेरे, वक्त पर काम आयेंगे! देखना! बदलता रहेगा हर चेहरे का रंग-रूप, धूप और पानी तो सब ये मौसम के नजारे हैं। उलझने तभी आती है जब जरूरी काम आयेंगे। शब्द! रख लो कुछ मेरे वक्त पर काम आयेंगे। @- राजेन्द्र सिंह कुँवर 'फरियादी'

Saturday, November 20, 2021

पानी होना चाहिए आँख में

पानी होना चाहिए आँख में।

आखों में भी पानी होना चाहिए
सिर्फ नदी नालों में पानी की औकात नही।
कृषि बिलों का महत्व कब क्या हो,
ये यूँ ही कोई किसानों को सौगात नही।

दवा हर मर्ज की मिलनी चाहिए
यहाँ रोगों की अपनी कोई औकात नही
कब कदम कहाँ रखना है
मालूम होना चाहिए ये कोई सौगात नही।

तुम लड़ो! हर आवाज मिलनी चाहिए
किसी ओर के आवाज की कोई औकात नही
कदम मेरे अपने हैं कहीं रखूँ
हर किसी के लिए अब ये कोई सौगात नही।

पानी होना चाहिए आँख में
जल-प्रपातों की यहाँ कोई औकात नही।
तुम क्या समझो समझ लेना!
मेरे किसानों को इससे बड़ी कोई सौगात नही। @ - राजेन्द्र सिंह कुँवर 'फरियादी'


Sunday, January 10, 2021

Bitcoin ethereum ripple बिटकॉइन इथेरियम रिप्पल

 समय के साथ साथ दिन-प्रतिदिन नई नई तकनीकियां चुनौती बनती जा रही है और यही चुनौतियाँ रोजगार सृजन का एक विशेष विकल्प भी बनती जा रही है। समय के साथ आगे बढ़ने के लिए हर इंसान को इन चुनौतियों से पार पाना ही होता है। यदि हम खुद को अपग्रेड नही कर पाते हैं तो कहीं न कहीं समय की नजरों में खुद को पिछड़ा हुआ महसूस करते हैं। जब जब धरातल पर कुछ नया होता है समाज मे दो पक्ष सदैव उभर के आते हैं एक साथ खड़ा होता है जबकि दूसरा विरोध की डोरियाँ पकड़ लेता है। ये समय हम लोग काफी समय से देखते आ रहे हैं। जैसे गैस आने पर, कम्प्यूटर आने पर, प्रेशर कुकर के मार्केट में आने पर ठीक उसी प्रकार फेसबुक, यूट्यूब या व्हाट्सएप आने पर भी कई समय तक लोगों ने इन सोशियल प्लेटफार्मों से दूरियां बना कर रखी, मगर आज यही हर घर के हर सदस्य की जरूरत बन कर रह गयी। बिना कम्प्यूटर और सोशियल मीडिया के लोग खुद को अपंग महसूस करने लगे हैं। यह सब जीवन जीने का एक माध्यम बन चुका है हर व्यक्ति देर में ही सही पर तकनीकी को गृहण जरूर करता है। इसका एक प्रमुख उदाहरण डिजिटल टेक्नोलॉजी है लोग अपने बच्चों को फोन से दूर रखते थे मगर आज पढ़ाई भी फोन से ही होने लगी है, ठीक चार साल पहले विश्व बाजार में क्रिप्टो करेंसी के नाम से बिटकॉइन के रूप में बहुत शोर हुआ कुछ ने इससे अपनाया तो कुछ ने इससे दूरियां बना ली। मगर तब बिटकॉइन की कीमत मात्र 27 हजार थी और कई कंपनियाँ एवं एक्चेंज इसको लीगल एवं इन लीगल की लड़ाईयां लड़ रहे थे यही बिटकॉइन ( Bitcoin) आज इंडियन रुपये में 30 लाख की सीमा पार कर चुका है। इसके साथ कई क्रिप्टो करेंसीज एवं टोकनों का जन्म होना स्वाभाविक है इस रूप में बहुत सी क्रिप्टो करेंसी एवं टोकन आज बहुत सारे विश्व के साथ साथ भारतीय एक्सचेंजों पर उपलब्ध हैं। जिनमे से इथेरियम (ethereum) रिप्पल (ripple ) लाईट कॉइन (Litecoin) आदि प्रमुख रूप से है। यदि आप भी इन क्रिप्टो ( Crypto Currency ) के बारे में जानना चाहते हैं या इन करेंसी की ट्रेडिंग करना चाहते हैं तो स्वतंत्र ररूप से भारतीय या विश्व के कई सारे एक्सचेंजों से कर सकते हैं। ये लीगल हैं या इन लीगल यह न सरकार बतायेगी और न ही कोई एक्चेंज, हाँ इससे यदि आप जुड़ते हैं तो आपके पैंसे से ये एक्चेंज भी कमाई कर रहें है और सरकारें भी। क्योंकि ट्रेडिंग इनकम पर टैक्स देना जरूरी है।लेकिन यदि ट्रेडिंग के दौरान आप अपनी धन संपत्ति से हाथ धो बैठते हैं तो न सरकार और न ही ये एक्चेंज आपकी आर्थिक मदद करेंगे। इसलिए यह रास्ता बहुत ज्यादा जोखिम भरा है कृपया इस पर चलने से पहले अपनी जानकारी पुख्ता जरूर करें। जितना ज्यादा जोखिम होता है कमाई या सफलता के चाँस उतने ही ज्यादा होते है। यह एक प्राकृतिक नियम है। इस पर आपकी क्या राय है जरूर साझा कीजिए। मेरी कोशिश है कि आप सभी के साथ इस तरह की तकनिकियाँ शेयर करता रहूँ। 

यदि आप भी इसमें ट्रेडिंग करना चाहते हैं तो वजीरेक्स एप्प के द्वारा कर सकते हैं उनके लिए यहाँ क्लिक करें। 




Friday, January 8, 2021

प्रेरणादायक विचार

कोई प्रशंसा करे या निंदा दोनों ही स्थिति में जीवन के मूल्य का ज्ञान हो जाता है, क्योंकि प्रशंसा प्रेरणा देती है और निंदा सावधान होने का अवसर प्रदान करती है। 



Monday, October 5, 2020

Digital Visiting Card डिजिटल बिजनेस कार्ड

समय के बदलाव बहुत ही जरूरी है, अन्यथा समय की रफ्तार अपने लहरों से हमें उस ओर धकेल देती हैं जहाँ से हम दूसरों पर निर्भर रहना ही मुनासिव समझते हैं। चाहे कोई भी कार्य हो या दुनियाँ की कोई भी डिजिटल तकनीकी (Digital Technology) हो हर व्यक्ति के लिए एक जैसी ही होती है, बस फर्क होता है तो सिर्फ और सिर्फ हमारे मन और मस्तिष्क के समझने का। अक्सर हममें से अधिकांशतः कुछ नया सीखने से पहले अपने मन एवं मस्तिष्क में कुछ ऐंसी धारणाएं बना लेते हैं कि उन्हें हर तकनीकी भारी सी लगने लगती है या फिर उनके मन मस्तिष्क में शिक्षा या तकनीकी अज्ञानता का ब्लॉकेज आ जाता है। जबकि ऐंसा बिल्कुल नही है। इंसान चाहे तो कुछ भी तकनीकी आसानी से सीख सकता है वो भी बिना तकनीकी ज्ञान के। जैंसे हम सभी लोग मोबाईल ऑपरेट करना सीखें हैं। इससे भी अच्छा उदाहरण छोटे बच्चों का ले सकते हैं वो कितनी आसानी से किसी भी तरह के मोबाईल को यूज कर लेते हैं। हम बात कर रहे थे डिजिटल विजिटिंग कार्ड (Digital Visiting Card ) या Digital actionable and clickable digital Business card. यह आधिनिकता का अहसास भी करा देता है साथ ही हमारा ई मेल, कॉन्टेक्ट नम्बर, वेब एड्र्स, व्हाट्सएप नंबर, टेलीग्राम लिंक, फेसबुक लिंक, इंस्टाग्राम लिंक, ट्विटर लिंक ( E mail, Contect number, website address, whatsapp number, telegram, facebook, instagram, twitter,( जितनी चाहे सारी डिटेल्स एक छोटे से फॉर्मेट में दे सकते हैं, यह सब इतना आसान है कि आप 15 मिनट में सीख सकते हैं। हाँ कई लोग इसकी सर्विस भी देते हैं मगर खुद के नॉलेज हेतु अच्छा होगा कि हम खुद सीखें। अन्यथा दूसरों पर निर्भर रहना पड़ता है। मैंने खुद इसे ट्राई किया और बना दिया। याद रहे मैं भी आप सभी की तरह कोई कम्प्यूटर के क्षेत्र का ज्ञान नही रखता हूँ और न ही कोई इंजीनियरिंग की डिग्री रखता हूँ। देहात के उन स्कूलों से पढ़ कर निकला हूँ जहाँ हिंदी सब्जेक्ट तक का अध्यापक नही होता था, बाकी इंग्लिश, मैथ एवं साइंस आदि तो बहुत दूर की बाते हैं। मैं आपको ये सब इसलिए बता रहा हूँ कि तकनीकी वाला बोझ आपके मन मस्तिष्क से हट जायेगा और आप का रुझान भी टेक्नोलॉजी की ओर बढ़ने लगेगा। इससे आपको मानसिक एवं शाररिक रूप से बहुत से फायदे होंगे, जब भी आप किसी क्रेटिविटी वाले सब्जेक्ट पर वर्क करते हैं तो मानसिक तनाव दूर हो जाता है मन अपनी क्रेटिविटी को लेकर प्रसन्न रहता है कोई थकावट महसूस नही होती, वी पी शुगर कंट्रोल रहता है।  मेरा पहला विजिटिंग कार्ड का जेपीजी फॉर्मेट ये है आपका भी ऐंसा हो सकता है। डिजाईनिंग आप अपनी पसंद के अनुसार कर सकते हैं। 


डिजिटल विजिटिंग कार्ड की जानकारी के लिए आप यहाँ क्लिक करेें। 

ऊपर वाले लिंक पर आपको डिजिटल विजिटिंग कार्ड कैंसे बनाना है पूरी जानकारी मिल जायेगी। सीखने में यह बहुत सरल है। इस तरह ही डिजिटल प्लेटफॉम की हर बारीकियों को आप तक पहुंचाता रहूँगा बाद आपका स्नेह मिलता रहे।  


Saturday, October 3, 2020

ढुंगा (Dunga)

 ~~~ ढुंगा ~~~

ढुंगा उठ्यां भी छन 

ढुंगा छुप्याँ भी छन 

ढुंगा फर्कणा भी छन 

ढुंगा सर्कणा भी छन

क्या बोन यूँ ढुंगों कु

ढुंगा ढुंगा भी नि छन! 

देखा टिडागी पौंडीं हफार 

निर्भाग्यों कु बण्युँ व्यापार

भौ कुई देंदु नि यूँ तैं कभी 

छौंदी कुड्यों बण्याँ खंद्वार! 

 ढुंगा उठ्यां भी छन 

ढुंगा छुप्याँ भी छन ......! 

टकराणा छिन आफुमा 

कच्चाकी पौंडीं देहगाथ 

मुछालौं सी सुलग्याँ छन 

कैंमा लगौंण छुयीं बाथ!

ढुंगा उठ्यां भी छन 

ढुंगा छुप्याँ भी छन .....!

समझणा भी छन 

ढुंगा ढुंगा ही छन

मुखुड़ि घसिं माटन्

माटासी यी खुश छन! @- राजेन्द्र सिंह कुँवर 'फरियाद'








Saturday, September 5, 2020

स्वरोजगार आपके दर पर

साउथ कोरिया सरकार का एक उपक्रम अपने 11 सालों के सफर एवं 14 देशों में अपनी मजबूत पकड़ बनाने के बाद अपने कदम भारत की ओर बढ़ा चुका है। इस कंपनी के मर्केटिंग हब ने पिछले तीन सालों से देश की सम्पूर्ण भौगोलिक प्रस्थितियों का बारीकी से निरीक्षण करने के बाद भारत मे प्रिलॉंचिंग प्रोग्राम शुरू किया था इसकी पकड़ मजबूती से बढ़ती जा रही है। ईकॉमर्स के लिए बेहतरीन स्वरूप ने नेटवर्किंग के रूप में पाने कदमों की रफ्तार बहुत तेजी से बढ़ाने का रिकॉर्ड प्राप्त किया है इस बात का अंदाजा आप खुद इस बात से लगा सकते हैं कि मात्र 11 सालों की समय सीमा के बावजूद भी विश्व के नेटवर्किंग स्थल पर खुद को 11वें पायदान पर ला कर खड़ा कर दिया। और यह स्थिति तब की है जब भारत जैंसे बड़े देश मे इसके कदम नही पड़े थे। नेटवर्किंग मार्केट के विशेषज्ञों का मानना है कि भारत मे शुरआत होने के 2 से 5 सालों के अन्दर यह इंडस्ट्रीज विश्व के प्रथम पायदान पर अपना नाम अंकित करेगी। भारत मे यह इंडस्ट्रीज अपने मैन्युफैक्चरिंग एवं रिसर्च डेवलोपमेन्ट प्रॉसेस भी करेगी। यानी हमारे देश के युवाओं को स्वरोजगार तो प्रदान करेगी ही साथ ही साथ हमारे देश के लॉकल उत्पादों को विश्व बाजार में एक बड़े ब्रांड के साथ उतारेगी। कंपनी एवं उसके वर्किंग प्रॉसेस पर लिखने के लिए बहुत कुछ है मगर इससे आपको केवल खुशी मिलेगी यदि आप वास्तव में खुद को स्वरोजगार की राह पर ले जाना चाहाते हैं तो अपने कदमों को रफ्तार दीजिए। सोचने से या सुनने से कोई स्वरोजगार नही कर पाता। यदि वास्तव में आप इस प्रॉसेस से जुड़ने की इच्छा रखते हैं तो संपर्क कर सकते हैं 9818583935। 

जुड़ने के लिए कोई इन्वेस्टमेंट नही है न ही कोई सेल्स करनी है और न ही कोई परचेजिंग का टारगेट है। आप फ्री माईंड से कंपनी के प्रॉसेस को फॉलो कर सकते हैं।

शैक्षिक योग्यता के प्रमाणपत्र की जरूरत नही है साथ ही आपकी उम्र 18 साल पूरी होनी चाहिए। 




Tuesday, August 25, 2020

ई कॉमर्स एक कैरियर बन रहा है।

हमारे देश में आजकल ई कॉमर्स का काफी बोलबाला है इस को गति देने साउथ कोरिया की एक ई कॉमर्स कंपनी देश मे अपने पाँव पसार रही है। कंपनी ने ईकॉमर्स और मल्टीलेबल मर्केटिंग को एक गठजोड़ के साथ प्रस्तुत करने का अद्भुत प्रयत्न किया है। कंपनी का यह प्लेटफॉर्म अपने आप में हमारे भारत देश के लिए अनोखा है। क्योंकि यहाँ पर जनसंख्या का घनत्व ज्यादा है, बेरोजगारी अपने चरम पर है इसके साथ साथ ई कॉमर्स एवं अनेकों मल्टीलेवल कंपनियाँ अपने आपको विस्तार दे रही हैं। मगर एटोमी एक मात्र ऐंसी कंपनी भारत में उतारने जा रही है जो मल्टीलेवल एवं ईकॉमर्स दोनों से जुड़े लोगों को अपनी ओर आकर्षित कर रही है। कंपनी ने बड़ी खूबशूरती से अपने सदस्यों के लिए इनकम प्लान डेवलॉप किया है। प्लान भी ऐंसा की आपको कंपनी से जुड़ने के लिए किसी भी प्रकार का शुल्क नही देना होगा। अपने उत्पाद की गुणवत्ता को कंपनी हर स्तर पर शतप्रतिशत उत्तम रखने का दावा भी करती है। कंपनी अपने बेहतरीन मैन्युफैक्चरिंग प्रॉसेस एवं रिसर्च डेवलॉपमेन्ट को अपना सबसे ताकतबर बैकबोन मानती है। बहुत कम समय मे कंपनी ने एक देश से होकर विश्व के 14 देशों में अपनी गुणवत्ता का लोहा मनवा चुकी है। जहाँ जहाँ कंपनी अभी काम कर रही हैं वहाँ पर जनसंख्या का घनत्व भारत जैंसे जनसंख्या घनत्व वाले देश से बहुत कम है, फिर भी कंपनी साल दर साल इस इंडस्ट्रीज में अपने रिकार्ड को बेहतर कर रही है। कहा तो ये भी जा रहा है कि भारत मे शुरू होने के दो से पाँच सालों के अन्दर कंपनी इस इंडस्ट्रीज में सबसे अच्छा रिकार्ड बना सकती है। खैर ये सब भविष्य की बातें हैं फिलहाल हमें अपना वर्तमान संभालना है। यदि आपको लगता है आप भी बिना इन्वेस्टमेंट के कंपनी के कदमों के साथ अपने कदम भी बढ़ाना चाहाते हैं तो आपके लिए यह एक अच्छा मौका हो सकता है। यह जॉब एवं व्यवसाय के बीच की कड़ी है। कंपनी से जुड़ने के लिए कंपनी आपको आपकी शैक्षिक योग्यता नही पूछेगी, कंपनी आपका धर्म नही पूछेगी, कंपनी आपका अनुभव नाही पूछेगी, साथ ही आपको जहाँ जहाँ कंपनी के ऑफिसेस हैं वहाँ वहाँ व्यवसाय के लिए द्वार खोल के रख देगी। अधिक जानकारी के लिए आप मुझे भी संपर्क कर सकते हैं। हो सकता है आपका एक डिसिजन आपको या आपके बच्चों को आपके सपनों की मंजिल पर लेकर जा सकता है। मेरा संपर्क सूत्र 9818583935










Thursday, July 16, 2020

उज्ज्वल भविष्य की संभवनाएं

एटोमी क्या आपके बच्चों के भविष्य को बेहतर बना सकती है। जानिए एटोमी क्यों करनी चाहिए और एटोमी का उद्देश्य क्या है ? क्या बिना इन्वेस्टमेंट के सिर्फ और सिर्फ मानवीय रिश्तों को जोड़ कर आगे बढ़ने से अन्तर्राष्टीय व्यवसाय की रहस्यमय दुनियाँ को जाना जा सकता है ? यदि अपनी पूरी जिंदगी में सिर्फ और सिर्फ हम अपने मित्रों एवं रिश्तेदारों को साथलेकर आगे बढ़ते हैं ये हमारे साथ जुड़ने वाले भी यदि इसी तरह आगे बढ़ने की सोच रखते हैं तो विश्वपटल के साथ व्यवसाय एवं जीवन के मधुर अनुभवों के पलों से भावविभोर होने से कोई नही रोक सकता। बस आपको सिर्फ और सिर्फ अपना एक कदम आगे बढ़ाना है। यदि इस विचार पर हम गहनता से विमर्श करें तो मेक इन इंडिया के सपनों को हम हकीकत में बदल सकते हैं। यह विश्व की एकमात्र इंडस्ट्रीज है जहाँ पर न तो शिक्षा के प्रमाण पत्रों के आधार को आधार माना जाता है और न ही आरक्षण को बरियात दी जाती है। यहाँ पर हम एक परिवार के रूप में आगे बढ़ते हैं। समान शिक्षा एवं समान कमाने का अधिकार भी हर किसी को मिलता है। समान पद पर पहुँचने के बावजूद भी आपस मे कोई टांग खिंचाई की भावना उत्पन्न नही होती। यहाँ पर गृहणी, विद्यार्थी, जॉब या व्यवसायी के लिए पहली सीढ़ी से ही आगे बढ़ने की परंपरा है। यदि एथिकल कंपनी की बात की जाय तो आपके ऊपर किसी नये व्यक्ति को जिम्मेदारी नही दी जाती या स्पष्ट शब्दों में कहा जाय तो किसी नये व्यक्ति को आपके ऊपर थोपा नही जाता है। सभी के लिए पहली सीढ़ी दर सीढ़ी चढ़ना अनिवार्य है। क्या आप तैयार हैं यदि हां तो अधिक जानकारी के लिए संपर्क करें 9818583935



Wednesday, July 1, 2020

हलवा एक पारंपरिक प्रसाद

उत्तरांखण्ड में कोई भी त्यौहार हो या शादी समारोह हलवा वहाँ का प्रमुख है या यूँ कह सकते हैं ये शुभ कार्यों के लिए एक प्रसाद है। आजकल उत्तरांखण्ड में लोग धान की रोपायियों में व्यस्त हैं। खेतों में काम करने वालों के लिए रोटी सब्जी के साथ हलवा जरूर बनता हैं पहले ये पारम्परिक तौर पर गेंहू के आटे का बनता था मगर समय के चक्र ने उससे भी लील लिया है।


Sunday, May 24, 2020

मार्केट में जॉब एवं व्यवसाय की स्थिति का आंकलन

इस लेख को ऊपर से नीचे तक पूरा पढ़े दिमाग की बत्ती जल सकती है।
अगर आप नेटवर्कमार्केटिंग में हो
तो अब लिस्ट बनाने का तरीका
आपके लिए लेकर आया हूँ, अब मत कहना के लिस्ट कैसे बनाऊँ? मैं तो किसीको जानता नही हूँ?

कुछ काम ऐसे है जो कि कोरोना की वजह से directly और indirectly बहुत ज्यादा disturb हुए है।
1. हलवाई
2. केटरिंग वाले
3. बैंड वाले, Dj वाले
4. stage & flower decoration
5. मैरिज हॉल
6. tent वाले
7. water camper वाले
8. entertainment like stage show से जुड़े artist
9. light decoration
10. लेडीज & जेंट्स कपड़े shop
11. ladies makeup /bridal make up womens
12. किराने वाले जिनसे शादियों पार्टियों का माल जाता है
13. auto टैक्सी, प्राइवेट बस वाले
14. सिनेमाहॉल और सिटीमोल्स से जुड़े लोग
15. टूरिस्ट और टूरिज़म से जुड़े लोग, टैक्सी चालक
16. होटल, ढाबे, रेस्टोरेंट
17. फ़ास्टफ़ूड से जुड़े हुए ठेले और दुकान
18. प्राइवेट ट्यूशन पढ़ाने वाले teacher
19. ऑटोमोबाइल सेक्टर और जुड़े लोग
20. रेलवे स्टेशन से जुड़े दुकानदार
22. cellphone industry
24. पार्लर और सलून
25. बिल्डिंग मैटेरियल,और मैन्यूफैक्चरिंग से जुड़े लोग
26. जिन लोगो की जॉब जा चुकी है या जाने वाली है
27. जिन लोगो को बड़े बड़े शहरों से काम छोड़ कर वापस घर आना पड़ा है
28. कोचिंग इंस्टिट्यूट चलाने वाले लोग
29. नॉकरी की तैयारी करने वाले(govt ने कहा है अब 1साल जगह नही निकलेंगी)
30. डिफेन्स जॉब की तैयारी करने वाले(सेना ने 9000 टेक्निकल पद समाप्त कर दिए)
31. insurance, RD, FD सेक्टर से जुड़े लोग
32. airlines or airport से जुड़े लोग
33. ऑनलाइन से जुड़ी food सर्विस zomato type
34. धार्मिक अनुष्ठान करने वाले पंडित जी
35. बड़े मंदिरों और मस्जिदों के बाहर दुकान लगाने वाले लोग
36. चाय की टपरी वाले
37. बड़े शहरों में जिनका काम किरायेदार रखने से ही चलता है
38. laundry और press वाले
39. टेलर लेडीज & जेंट्स
40. इंसान के मनोरंजन से जुड़े जादूगर, मेले वाले, फ़िल्म, नाटक इंडस्ट्री मे काम करने वाले लाखों लोग
41. छोटी मोटी बहुत सारी network marketing से जुड़े लोग
42. ऑटो पार्ट्स रिपेयर मिस्त्री
43. विदेश यात्राओं से जुड़ी कंपनियां और एजेंट्स
44. विदेशों से वापस भारत लौटे हुए लोग
45. court मे काम करने वाले वकील और अन्य लोग
46. हर सेक्टर के लाखों सेल्समैन
47. कई तरह के दुकानदार

ऐसे ओर भी कई profession है जोकि 50% से100% तक हिल गए है कई प्रोफेशन तो खत्म हो गए है और ये हाल कम से कम आने वाले 6महीने तो रहेगा ही।

कौन कहता है कि मेरे पास लिस्ट नही है अब ये सब आपके प्रॉस्पेक्ट है अब आप इन लोगो की भी लिस्ट तैयार कर सकते है और वादा है मेरा आपको इनमें से 80% लोग ध्यान से सुनेंगे।

इन्हें समझा सकते है mlm की ताकत और या तो 6महीने घर बैठे या 6महीने काम करके इस ई कॉमर्स नेटवर्क मार्केटिंग बिज़नेस को 2nd option के रूप मे खड़ा कर ले।

जाते जाते साथियों
अब दुनिया 2 हिस्सों में बंट जाएगी

कोरोना से पहले की दुनिया
कोरोना के बाद कि दुनिया

तो
कोरोना के बाद कि दुनिया
में अब लिस्ट इतनी बड़ी बन सकती है जिसका हिसाब नही लगाया जा सकता

अगर आप अपने किसीकी मदत करना चाहते हो दिलसे

तो ये पोस्ट हर नेटवर्क मार्केटिंग करनेवालो तक पहुंचाओ

क्योंकि
अब
डायरेक्ट सेल्लिंग ही वो ज़रिया होगा
जिससे हम
करोडों लोंगो की ज़िंदगी मे एक छोटा बदलाव ला सकते है
और हिंदुस्तान को
सही मायनों में
आत्मनिर्भर बना सकते है

एक ज़िम्मेदार नागरिक बनकर आओ इस देश के लोंगो को एक नई राह दिखाते हैं।

अधिक जानकारी हेतु संपर्क करें।



सी यू ई टी (CUET) और बोर्ड परीक्षा का बोझ कब निकलेगा।

मेरा देश कहाँ जा रहा है। आँखें खोल के देखो।  सी यू ई टी ( CUET) के रूप में सरकार का यह बहुत बड़ा नकारा कदम साबित होने वाला है। इस निर्णय के र...