सफलता एक दिन में नही मिलती, लेकिन इससे ज्यादा महत्वपूर्ण है सफलता बिना सीखे, भी नही मिलती। इस कड़ी में देहरादून के राहुल भटनागर जी को सुनते हैं उनकी जिंदगी के पहलू से हो सकते हम खुद को रिलेट कर पायें। एक असफलता से सीखना बहुत सरल एवं महत्वपूर्ण है। क्योंकि समाज कि हर नजर असफलता को खरोंचती रहती है। हम सभी इसके अनेकों बार शिकार हुये हैं। परन्तु यह सत्य है जो इन बातों से घबरा कर बैठ गया वो कभी सफलता की सीढ़ियां नही चढ़ सकता।
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विजयदशमी
ढाल तलवार नहीं, मन को उठाना है, भीतर जो रावण है, पहले उसे हराना है। दस मुख नहीं, दस विकार हम ढोते हैं, काम, क्रोध, लोभ में हर रोज खोते हैं। ...
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दूसरों की खुशियों पे दुःख जताने वालों, आसमां की तरह छत चाहाने वालों, क्यों तिनके तिनके पे, इस कदर जलते हो, जब जलना ही है त...
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मैं अपने ही घर में कैद हूँ मुझे अपनों से ही आजादी चाहिए रोती बिलखती सर पटकती रही मैं अब मेरी आवाज को एक आवाज चाह िए जी रही हूँ कड़वे घूँट...
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जन जन से मिल कर शहर से निकल कर आती है सहमी सी आवाज की तुम मुझे बचालो! मुझे बचालो ! मुझे बचालो ! हर एक पहाड़ से टकराकर ...