Saturday, November 8, 2014

बंद कर दो पढना इन हाथों की लकीरों को,
हर चहरे से आजकल रईशी झलकती है l - सर्वाधिकार सुरक्षित  @ राजेन्द्र सिंह कुँवर 'फरियादी' 


विजयदशमी

ढाल तलवार नहीं, मन को उठाना है, भीतर जो रावण है, पहले उसे हराना है। दस मुख नहीं, दस विकार हम ढोते हैं, काम, क्रोध, लोभ में हर रोज खोते हैं। ...