Saturday, December 21, 2019

हम और हमारी यादें

तुम नही आते
आजकल
व्यस्तता की
उलझनों में
सिमट कर
रह गये हैं।

पर कहाँ ?
खेत खलिहान
घर परिवार
सब तो अब
जमाने की
बातें हो चली!

हाँ कोई नया
झुनझुना मिला होगा
उसने समेट लिया
मन को मन से
तभी सब कुछ
भुलाकर गुमसुम हो।

बस लड़ रही हैं!
अपने सुकून के लिए
हम और हमारी यादें। @ - राजेन्द्र सिंह कुँवर 'फरियादी'

संघर्ष

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