बाँसुरी सुनते ही ह्रदय में कोमल मनोहर संगति की लहर हिचकोले खाने लगती है। कहते है बाद्य यंत्रों में बाँसुरी का महत्वपूर्ण स्थान है। संगीत कि पंगत सजी हो और बाँसुरी न हो तो पंगत का माहौल मधुरता को नही समेट पाता है। आईये जानते हैं। बाँसुरी के स्वरों के बारे में।
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संघर्ष
धर्म-अधर्म की लड़ाई ले रही थी अंगड़ाई, दूर बैठे हंस रहे थे बाबू ले रहे थे जम्हाई। हौसले कभी टूटते नही जब मन से तैयारी होती,...
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दूसरों की खुशियों पे दुःख जताने वालों, आसमां की तरह छत चाहाने वालों, क्यों तिनके तिनके पे, इस कदर जलते हो, जब जलना ही है त...
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मैं अपने ही घर में कैद हूँ मुझे अपनों से ही आजादी चाहिए रोती बिलखती सर पटकती रही मैं अब मेरी आवाज को एक आवाज चाह िए जी रही हूँ कड़वे घूँट...
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जन जन से मिल कर शहर से निकल कर आती है सहमी सी आवाज की तुम मुझे बचालो! मुझे बचालो ! मुझे बचालो ! हर एक पहाड़ से टकराकर ...