Sunday, November 30, 2014

मेरे एक शब्द में कभी जी के देखिए,

तुम्हें हर मौसम का नजारा मिल जायेगा l 

बंजर में भी महकती हुई हरियाली,

और हरियाली में बंजर मिल जायेगा  ll  @ -  रचना -सर्वाधिकार सुरक्षित -राजेन्द्र सिंह कुँवर 'फरियादी'  

विजयदशमी

ढाल तलवार नहीं, मन को उठाना है, भीतर जो रावण है, पहले उसे हराना है। दस मुख नहीं, दस विकार हम ढोते हैं, काम, क्रोध, लोभ में हर रोज खोते हैं। ...