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Tuesday, October 20, 2026

विजयदशमी

ढाल तलवार नहीं, मन को उठाना है,
भीतर जो रावण है, पहले उसे हराना है।

दस मुख नहीं, दस विकार हम ढोते हैं,
काम, क्रोध, लोभ में हर रोज खोते हैं।

राम ने वन काटा, पर धीरज न छोड़ा,
मर्यादा में रहकर ही, हर बंधन तोड़ा।

आज न पुतला जले, अहंकार जलाओ,
सीता सी निष्ठा मन में फिर से बसाओ।

जो दूसरों की हार में अपनी जीत गिने,
वो दशहरा क्या समझे, क्या दीप जले?

सच्ची विजय वही, जो खुद पर पाई जाए,
मन में राम बसे तो, दशा ही बदल जाए। @ - राजेन्द्र सिंह कुँवर ‘फरियादी’

Tuesday, October 8, 2019

~ 'चलो चाँद देखें'~


चाँद को चाँद की तलाश
आसमाँ भी खुश है आज
बादल महक रहे हैं देख
छतों का हर्षोल्लास!

निगाहें झाँक रही हैं
खुद का विश्वास
महकती छवि आज
गर्वित हुआ एहसास।

श्रद्धा मन मे उमड़ती
कर अलौकिक श्रृंगार
चाँद भी मदहोश हुआ
पा कर चाँद का दीदार! @ - राजेन्द्र सिंह कुँवर 'फरियादी'

#करवाचौथ
#दीदार_चाँद_का

विजयदशमी

ढाल तलवार नहीं, मन को उठाना है, भीतर जो रावण है, पहले उसे हराना है। दस मुख नहीं, दस विकार हम ढोते हैं, काम, क्रोध, लोभ में हर रोज खोते हैं। ...