Saturday, September 1, 2012

सांसों को को देखता ही नहीं

दिल ले गया था कोई कभी 
अब तो जिस्म ही बेजान है !
सांसों को कोई देखता ही नहीं, 
पत्थर भी कहने को यहाँ भगवान  है !! .......रचना - राजेन्द्र सिंह कुँवर 'फरियादी' 

संघर्ष

धर्म-अधर्म की लड़ाई ले रही थी अंगड़ाई, दूर बैठे हंस रहे थे बाबू ले रहे थे जम्हाई। हौसले कभी टूटते नही जब मन से तैयारी होती,...