Saturday, June 21, 2014

मैं तो घर ही ढूढने निकला था शहर में पर,

कई माकन मिले हैं मेरे साथियों के सफ़र में,

आँगन भी कुछ यूँ भरे थे गाड़ियों से,

और सिमटी हुई एक ओर मेरी खटिया पड़ी थी !! @ राजेंद्र सिंह कुँवर 'फरियादी'


संघर्ष

धर्म-अधर्म की लड़ाई ले रही थी अंगड़ाई, दूर बैठे हंस रहे थे बाबू ले रहे थे जम्हाई। हौसले कभी टूटते नही जब मन से तैयारी होती,...