Thursday, May 16, 2024

सी यू ई टी (CUET) और बोर्ड परीक्षा का बोझ कब निकलेगा।

मेरा देश कहाँ जा रहा है। आँखें खोल के देखो। 

सी यू ई टी ( CUET) के रूप में सरकार का यह बहुत बड़ा नकारा कदम साबित होने वाला है। इस निर्णय के रूप में सरकार या तो स्कूली शिक्षा पर विश्वास नही कर पा रही है या विद्यार्थियों से भी पैंसे उगाई की एक एक स्किम बना रही है। समझ नही आ रहा यहाँ पर बोर्ड परीक्षा परिणाम के बाद आखिर सी यू ई टी की क्या जरूरत थी। इस से बच्चों पर एक नया बोझ बढ़ा है। इससे अच्छा होता कॉलेजों की संख्या बढ़ाती। ये तो उस विद्यार्थी के स्किल पर शक करने जैसी बात हो गयी जो पूरे साल मेहनत कर के अपनी बोर्ड परीक्षा को पास करता है। या देश के बाहरवीं बोर्ड परीक्षा के सिलेबस पर सवाल है। यदि स्किल ही मेजर करना था तो एक दिन की 2 घंटे की परीक्षा से भी विद्यार्थी का स्किल मेजर किया जा सकता था।  युवाओं के लिए ये वैरियर क्यों लगाये जा रहे हैं। सरकार को इस तरह के सुवाव देनी वाली संस्थाओं का भी मूल्यांकन होना जरूरी है। काश हर युवा इन पद्धतियों को सोच और समझ रहा होता? 

हर माता-पिता के चेहरों पर सी यू ई टी परीक्षा स्थल पर एक मायूसी थी जबकि उनका बच्चा सरकार द्वारा संगठित बोर्ड के नियमों के अनुरूप परीक्षा देकर अपनी स्किलता का अच्छा आधार प्रमाणित कर चुका था फिर क्या जरूरत थी ?

यह कोई अच्छा नजरिया नही है कॉलेजों में प्रवेश पाने का बल्कि विद्यार्थियों के स्किल पर उंगली उठाना जैंसा कदम है। इस विषय प्रदेश को बुद्धिजीवी भी सायद अभी तक अनजान ही हैं या किसी ने सोचा नही है जब एक उसी स्टैण्डर्ड की परीक्षा को विद्यार्थी पास कर चुका है तो फिर यह क्यों ? 

कुछ लोगों की अलग राय हो सकती है कॉलेजों में प्रवेश को लेकर लेकिन जब वो लोग भी गहराई में जाकर सोचेंगे तो उनको भी परिणाम यही दिखेंगे। 

स्किल इंडिया क्या यही है कि युवाओं को इस तरह की पतिक्षाओं में उलझा कर रख दो ताकि वो परीक्षाओं एवं परिणामों तक ही सीमित रहें। ये मेरा अपना मत है , सी यू ई टी की परीक्षाओं से लेकर बच्चों की हताश तक आज देखने को मिली है। लगता है हमारी सरकारें स्वास्थ्य एवं आधारभूत शिक्षा देने में पिछड़ रही है। बाकी रोजगार की तो बात ही क्या की जाय। लगता है सरकार के पास देश के युवाओं के लिए शिक्षा की उचित व्यवस्थाएँ नही हैं इस लिए जाने अनजाने में इन हथकंडों को अपनाया जा रहा है। यह एक बहुत बड़ा भ्रमजाल हो सकता है आशा है इन मुद्दों को लेकर कानून का कोई अच्छा जानकार कोर्ट में जनहित याचिका जरूर लगाए ताकि लाखों युवाओं के भविष्य एवं देश की शिक्षा पद्धति और अभिभावकों के साथ युवाओं के स्किल का सम्मान रखा जाये। बच्चों को अपने अनुकूल विषय बस्तु चुनने का अधिकार मिलना जरूरी है। क्या यही व्यवस्था भारत को विश्व गुरु बनायेगी? 



Sunday, July 30, 2023

मशरूम च्युं

मशरूम ( च्युं ) मशरूम प्राकृतिक रूप से उत्पन्न एक उपज है। पाहाडी क्षेत्रों में उगने वाले मशरूम। 

Sunday, June 18, 2023

उत्तराखंड के फल-फूल

तिमला (Timla)




आम (Aam)


सेब (Seb) Apple


आरु (आडू) Aadu


शहतूत (Shahtut)


मोलू (Mili)

बुराँस का पेड़ (Burans)

काफल का पेड़ (Kaafal)


काफल



घिंगारु ( Ghingaaru)
गुच्छी मशरूम

प्राकृतिक मशरूम (च्च्यूं) 


लिंगाड़े


रत्ता दाणी



ढादु





Saturday, April 15, 2023

मालू के पत्तलों एवं डोने (Maalu Done Pattal)

यदि आप गूगल, फेसबुक या सोशियल मीडिया के अन्य प्लेटफॉमों का उचित उपयोग करते हैं तो क्या नही मिल सकता है। बस मन में सदैव कुछ नया सीखने की चाह होनी चाहिए। गूगल या सोशियल मीडिया हर प्रकार से हमें सहायता मिलती है बशर्ते हम उन्हें उचित तरीकों से इस्तेमाल करना सीख जायें। आप सभी साथियों को यह जानकर हर्ष होगा कि विनोद घिल्डियाल जी कीर्तिनगर के मालूपाणी गाँव जिला टिहरी गढवल में मालू के पत्तल (प्लेट ) एवं डोने (कटोरियाँ ) एक समूह के साथ बना रहे हैं। अभी छोटी मात्रा में है उनका ये कारोबार, इसे आगे बढ़ाने हेतु जिला उधोग केंद्र से भी संपर्क साध रहे हैं।
आप सभी मालू के पत्तलों एवं डोने हेतु श्री विनोद जी से संपर्क कर सकते हैं। 
Vinod Ghildiyal ji +91 99271 46430

मुझे नही लगता है कि कभी उन्होंने गूगल की वर्ड सीखा होगा परंतु उनका की वर्ड से आज हर व्यक्ति उन तक आसानी से पहुँच सकता है। यदि डिजिटल का वास्तविक स्वरूप है। आप भी अपने उत्पाद एवं सर्विस को गूगल पर पंजीकृत (रजिस्टर्ड ) जरूर करें। 


मुझे उनका पता निम्न लिंक से प्राप्त हुआ

https://www.google.com/search?q=maalu+dona+pattal&hl=en-IN&authuser=1&ei=F6E6ZLTaPKvKseMPtISxyAs&oq=maalu+dona+pattal&gs_lcp=ChNtb2JpbGUtZ3dzLXdpei1zZXJwEAM6BAgeEAo6BQgAEKIESgQIQRgBUPQQWPEmYLItaABwAHgAgAGWAogBswmSAQUwLjQuMpgBAKABAcABAQ&sclient=mobile-gws-wiz-serp#trex=m_t:lcl_akp,rc_f:rln,rc_ludocids:13792938135258457118,ru_gwp:0%252C7,ru_lqi:ChFtYWFsdSBkb25hIHBhdHRhbEj2qKuG87mAgAhaIxAAEAEQAhgAGAEYAiIRbWFhbHUgZG9uYSBwYXR0YWwyAnRhkgEVZGlzcG9zYWJsZV9pdGVtc19zaG9wqgE6EAEqFSIRbWFhbHUgZG9uYSBwYXR0YWwoLjIfEAEiGx6oVYk2MCPLjuvaQsjiGw-891rJQlooXX6LsQ,trex_id:rkKUHe&lpg=cid:CgIgAQ%3D%3D

#मालू
#पत्तल
#डोने
#मालुकेपत्तल
#मालुकेपुडखे

Monday, October 10, 2022

खिड़कियाँ

आखिर तुम कब खोलोगे ?

खिड़कियाँ!
अपने मन मस्तिष्क की।

कानून, न्याय और अधिकार
सब पर आधिपत्य है तुम्हारा!

अपनी उलझनों पर तुम
चटकनियाँ चढ़ा के बैठे हो,
तुम्हारे हाथ मे कुछ नही
ये किस कंठ से कहते हो!

राम बनने की कोशिश में
हवा को छू लेते हो।
नाच रहा रावण मस्तिष्क पर
ये घूट कैसे पी लेते हो!

चाल दिख रही है हर एक को
ये कदमताल भी तुम्हारी ही है,
तुम जी रहे हों किस वहम में
ये लाचारी भी तुम्हारी ही है।

आखिर कब खोलोगे ?
खिड़कियाँ!
अपने मन-मस्तिष्क की। @- राजेन्द्र सिंह कुँवर 'फरियादी'

#राजनेता
#टूटतासमाज
#तड़फतीइंसानियत
#कुर्सियाँ
#चालाकियाँ




Sunday, April 17, 2022

आपके शौक

कब कहाँ और कैंसे यह अचानक लोगों के लिए प्रेरणा बन जायें यह कोई सोच भी नही सकता। आज दुनियाँ में लाखों उदाहरण भरे पड़े हैं। जिन लोगों ने अपने शौक को निरंतर रूप से आगे बढ़ाया है उनका शौक समाज के लिए प्रेरणा तो बन गया परन्तु उस शौक ने उनके साथ साथ हजारों लोगों की जिन्दगी ही बदल डाली। पैंसा एवं प्रतिष्ठा ये दो ही ही शब्द हैं जिनके लिए हर व्यक्ति पूरी जिन्दगी भर समय एवं सांसारिक भावनाओं का बोझ ढोता है। जो भी दुनियाँ में आता है इन दोनों शब्दों से खुद को न चाहाते हुये भी अलग नही कर सकता है। यह एक चमत्कार है। आज दुनियाँ के सामने करोड़ों रास्ते हैं इन दोनों तक कि पद यात्रा करने के लेकिन 99% लोग बीच में ही अपनी आशाएँ छोड़ देते हैं, इसमें सबसे बड़ी बाधा समाज का मार्गदर्शन। जितने भी लोग आज सफल हुये हैं उनका सफलता का एक ही राज है शौक, यदि वह अपने शौक का गला घोट देते तो सफलता नही मिलती। समाज की नजरें आपको तब तक रोकती हैं जब आप सफल नही बन जाते, आपके सफल बनते ही समाज का नजरिया स्वतः ही बदल जाता है। याद रखें जो सामाजिक जन आकांक्षाएँ आपके कदमों पर सरसरी नजरें गढ़ायें रहती हैं वही आपके सफल होते ही आपकी वाहवाही करने लगती हैं। किसी भी बड़े प्रतिष्ठित व्यक्ति की जीवनी  उठा कर देखें प्रत्यक्ष प्रमाण मिल जाता है। हम सब ये जानते हैं तो भी सफलता का प्रतिशत सदैव कम ही क्यों रहता है? इसका मुख्य कारण है 95% व्यक्ति व्यक्ति निरन्तरता से थक जाते हैं। यदि आप भी थक रहे हैं तो असफलता का दरवाजा आपका इंतजार कर रहा है।


Monday, February 21, 2022

जन्मजात योग्यता

लेखन और वाचन ऐंसे अद्भुत प्लेटफॉर्म हैं जो कि लाखों लोगों की मनो दशाओं को पुनर्जीवित कर लेते हैं मगर ये सब उस पर निर्भर होता है जो सुनता है या पढ़ता है। कुछ योग्यताएँ इंसान के अन्दर जन्मजात होती हैं। जरूरी नही सबसे ज्यादा अभ्यास करने वाला ही सफल होता है। अपने उन गुणों की पहिचान करना अत्यधिक जरूरी है। खुद को जाँचिए कहीं आप विपरीत दिशा की ओर तो नही जा रहे है। ऐंसा अक्सर इसलिए होता है कि हम लोग देखा देखी की दौड़ में खुद को पहिचान ही नही पाते हैं। अपने पड़ोसी, दोस्त या रिश्तेदार की देखादेखी में खुद की मिट्टी को पहिचान ही नही पाते हैं। साथ ही घरवालों के साथ साथ समाज का दबाव इतना अधिक होता है कि हम लोग न चाहाते हुये भी अपने जन्मजात प्रतिभा को कभी पहिचानने की कोशिश ही नही करते बस देखा देखी की हवा में बह कर अपने कैरियर को उलझा के रख देते हैं। अठारह वर्ष से अठाईस तीस कब निकल जाते हैं आज के युवा को मालूम ही नही पड़ता, जब तक वह खुद को देखने लायक होता है उसके जीवन पर डिग्रियों का भार बढ़ जाता है, कोई भी डिग्री या सर्टिफिकेशन किया है तो दूसरा रास्ता उसके लिए एक दीवार बन कर खडा हो जाता है वो अठाईस से लेकर तीस बत्तीस साल तक अपनी डिग्री को रास्ते पर ले जाने कि कोशिश करता है मगर अपनी लाईफ को कभी एनालाईज (Analyse) करने की कोशिश नही कर पाता इतने में भी सांसारिक रीति रिवाजों के बंधन भी घर वालों के कारण भार बनते चले जाते हैं और फिर एक बीमारी जिससे लोग तनाव कहते हैं घेर लेती है। हां कार्य कोई बड़ा या छोटा नही होता मगर उस कार्य को करने के लिए हमारे अन्दर जन्मजात योग्यता है कि नही यह जान लेना आज के समय मे अत्यधिक महत्वपूर्ण है। खासकर युवा साथियों को अपने कैरियर चुनते हुए खुद को जान लेना बहुत जरूरी है। उदाहरण भरपूर भरे पड़े हैं हर तीसरा व्यक्ति अच्छे पैंसे कमाकर या अच्छे सूट पहन कर आप लोगों को मोटिवेट कर रहा है और युवा ह्रदय अति शीघ्र मोटिवेट हो भी जाता है मगर क्या लाखों की पढ़ाई या मोटिवेशन ट्रेनिंग तुम्हें तुम्हारा अस्तित्व दे पायेगी या नही। कृपया देखा देखी में कभी भी अपने जीवन को न उलझाएं। हर तथ्य को पलट कर जरूर देखें आज के समय में जितनी बेरोजगारी बढ़ रही है उससे कई गुना तेजी से जॉब, व्यवसाय ये स्टार्टअप बढ़ रहे हैं। अपने जन्मजात गुण खंगालना शुरू करें। यदि आपके पास कोई अच्छा सर्टिफिकेशन, डिग्री या पद है तो उसको लगातार अपग्रेड करते रहें। यदि नही है तो भी खुद को आज के एवं आने वाले समय के अनुसार अपग्रेड करो। यदि आप अपनी डिग्री या डिप्लोमा या पद प्रतिष्ठा के कारण खुद के अपग्रेडेशन को रोक रहे हैं तो यह खुद के साथ एक धोखा है। 

सी यू ई टी (CUET) और बोर्ड परीक्षा का बोझ कब निकलेगा।

मेरा देश कहाँ जा रहा है। आँखें खोल के देखो।  सी यू ई टी ( CUET) के रूप में सरकार का यह बहुत बड़ा नकारा कदम साबित होने वाला है। इस निर्णय के र...