बिखरे हुए अक्षरों का संगठन
ब्लॉग में आपको अनेक विषय वस्तुओं पर जानकारियाँ मिलेंगी जैंसे Education, Technology, Business, Blogging आदि।
Tuesday, October 20, 2026
विजयदशमी
Saturday, July 25, 2026
संघर्ष
धर्म-अधर्म की लड़ाई
ले रही थी अंगड़ाई,
दूर बैठे हंस रहे थे
बाबू ले रहे थे जम्हाई।
हौसले कभी टूटते नही
जब मन से तैयारी होती,
जो खुद को सबसे ऊपर समझते
आत्मानएँ अक्सर उनकी रोती।
दानवीर और क्षमावीर क्यों,
चुपचाप यूँ छुपे पडे थे,
क्या बिगाड़ेगा कॉकरोच
सोच कर यूँ अडींग खड़े थे।
देखा हिलता सिंघासन
अचानक यूँ प्रकट हुये
सुलह हुई साम्राज्य की
आँसू खुद के गटक लिए। @ - राजेन्द्र सिंह कुँवर 'फरियादी'
Thursday, May 16, 2024
सी यू ई टी (CUET) और बोर्ड परीक्षा का बोझ कब निकलेगा।
Sunday, July 30, 2023
मशरूम (च्युं): एक प्राकृतिक उपज और औषधीय खजाना
🌿 मशरूम (च्युं) के महत्वपूर्ण गुण पोषण से भरपूर:
मशरूम में प्रोटीन, फाइबर, विटामिन B, D, सेलेनियम, पोटैशियम, तांबा, और आयरन प्रचुर मात्रा में होते हैं। कम कैलोरी और वसा रहित:
यह वजन कम करने वाले लोगों के लिए उत्तम आहार है। एंटीऑक्सिडेंट से भरपूर:
इसमें ergothioneine और glutathione जैसे तत्व पाए जाते हैं जो शरीर में कोशिकाओं को फ्री रेडिकल्स से बचाते हैं। प्रतिरक्षा शक्ति बढ़ाना:
मशरूम शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाता है और वायरल संक्रमण से बचाता है। एंटी-कैंसर गुण:
कुछ शोध बताते हैं कि मशरूम में पाए जाने वाले बायोएक्टिव कंपाउंड्स कुछ प्रकार के कैंसर की संभावना को कम करते हैं। डायबिटीज़ में सहायक:
इसमें ग्लाइसेमिक इंडेक्स कम होता है, जिससे यह मधुमेह रोगियों के लिए लाभकारी होता है। 🌱 पहाड़ी क्षेत्रों में मशरूम (च्युं) का प्राकृतिक रूप से उगना
पहाड़ी क्षेत्रों जैसे उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश, नेपाल, सिक्किम और पूर्वोत्तर भारत में मशरूम वर्षा ऋतु (मानसून) में अधिक मात्रा में उगते हैं। ये मुख्यतः जंगलों, बगीचों, कटी लकड़ियों, नमी भरे स्थानों और गिरी हुई पत्तियों पर प्राकृतिक रूप से उत्पन्न होते हैं। उगने की प्रक्रिया: नमी और तापमान:
मशरूम को उगने के लिए उच्च आर्द्रता और 20–30°C तापमान की आवश्यकता होती है। बायोडीकम्पोज़िशन:
पुराने पत्ते, लकड़ियाँ, गाय/भैंस का गोबर आदि जब सड़ते हैं, तो उनसे खाद बनती है जो मशरूम की वृद्धि को पोषण देती है। बीजाणु (Spores):
मशरूम के बीजाणु हवा में फैलते हैं और जब उपयुक्त वातावरण मिलता है, तो वे अंकुरित होकर मशरूम का निर्माण करते हैं। 🍄 मशरूम (च्युं) के प्रकार (पहाड़ी क्षेत्रों में पाए जाने वाले)
गुच्छी (Morchella):
दुर्लभ और अत्यधिक महंगी प्रजाति, जो हिमालयी क्षेत्रों में स्वाभाविक रूप से उगती है। दूधी च्युं (Milky Mushroom)
भूरे च्युं (Button Mushroom)
सफेद मशरूम (Oyster Mushroom)
सावधानी
सभी मशरूम खाने योग्य नहीं होते। जंगलों में उगने वाले कुछ मशरूम जहरीले होते हैं और पहचान में कठिन होते हैं। इसलिए केवल अनुभवी व्यक्ति द्वारा पहचाने गए मशरूम का ही सेवन करें।
Sunday, June 18, 2023
उत्तराखंड के फल-फूल
तिमला (Timla) क्या है? वर्ग: यह अंजीर (Fig) परिवार का एक जंगली फल है।
प्राकृतिक रूप से उगता है: यह उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश, नेपाल, जम्मू-कश्मीर और पूर्वोत्तर भारत के पहाड़ी इलाकों में पाया जाता है। वृक्ष: इसका पेड़ मध्यम आकार का होता है और इसकी पत्तियाँ बड़ी और गहरी होती हैं। फल छोटे, गोल और बाहर से हरे या बैंगनी रंग के होते हैं।
तिमला के पोषक तत्व
तिमला में प्राकृतिक रूप से पाए जाते हैं: फाइबर विटामिन A, C और K कैल्शियम, पोटैशियम, आयरन एंटीऑक्सिडेंट और एंटीबैक्टीरियल तत्व
तिमला (Timla) के आयुर्वेदिक और औषधीय लाभ पाचन शक्ति बढ़ाता है तिमला में उच्च मात्रा में फाइबर होता है, जो कब्ज को दूर करता है और आँतों की क्रियाशीलता सुधारता है। डायबिटीज़ में सहायक इसके फलों और पत्तों का काढ़ा रक्त शर्करा नियंत्रित करने में सहायक होता है। हृदय स्वास्थ्य के लिए लाभकारी यह कोलेस्ट्रॉल कम करने में मदद करता है और रक्त परिसंचरण सुधरता है। त्वचा रोगों में उपयोगी आयुर्वेद में तिमला को त्वचा संक्रमण, खुजली और फोड़े-फुंसी के उपचार में उपयोग किया जाता है। गले और श्वसन तंत्र के लिए लाभकारी इसके पके फलों का सेवन गले की खराश, खांसी और ब्रोंकाइटिस जैसी समस्याओं में लाभ देता है। दूध उत्पादन में सहायक (स्तनपान कराने वाली माताओं के लिए) पारंपरिक ज्ञान में इसे दूध की मात्रा बढ़ाने में उपयोगी माना जाता है।
पहाड़ी क्षेत्रों में तिमला का महत्त्व
स्वस्थ पारिस्थितिकी तंत्र का हिस्सा: तिमला के पेड़ पशु-पक्षियों के लिए भी भोजन और आश्रय प्रदान करते हैं, विशेषकर बंदर, चिड़ियाँ और मधुमक्खियाँ इसके फल व रस का सेवन करती हैं। स्थानीय चिकित्सा में प्रयोग: ग्रामीण और पहाड़ी समुदाय इसका उपयोग पारंपरिक घरेलू उपचारों में करते हैं। कुपोषण के विरुद्ध प्राकृतिक विकल्प: यह प्राकृतिक सुपरफूड पहाड़ी ग्रामीणों के लिए आवश्यक पोषण उपलब्ध कराता है, विशेषकर उन इलाकों में जहाँ आधुनिक चिकित्सा या पैकेज्ड फूड आसानी से नहीं पहुँचते।
तिमला का उपयोग कैसे करें?
फल के रूप में ताजा खाएं सूखा कर पाउडर या औषधि के रूप में उपयोग करें पत्तों का काढ़ा या रस बनाएं घरेलू नुस्खों में उपयोग करें (त्वचा, पेट या खांसी के लिए) सावधानी
अधिक मात्रा में सेवन करने से कभी-कभी दस्त या पेट में गैस हो सकती है। यदि आप एलर्जी प्रवृत्ति के हैं तो पहले थोड़ी मात्रा से शुरू करें।
Saturday, April 15, 2023
मालू के पत्तलों एवं डोने (Maalu Done Pattal)
Monday, October 10, 2022
खिड़कियाँ
आखिर तुम कब खोलोगे ?
खिड़कियाँ!
अपने मन मस्तिष्क की।
कानून, न्याय और अधिकार
सब पर आधिपत्य है तुम्हारा!
अपनी उलझनों पर तुम
चटकनियाँ चढ़ा के बैठे हो,
तुम्हारे हाथ मे कुछ नही
ये किस कंठ से कहते हो!
राम बनने की कोशिश में
हवा को छू लेते हो।
नाच रहा रावण मस्तिष्क पर
ये घूट कैसे पी लेते हो!
चाल दिख रही है हर एक को
ये कदमताल भी तुम्हारी ही है,
तुम जी रहे हों किस वहम में
ये लाचारी भी तुम्हारी ही है।
आखिर कब खोलोगे ?
खिड़कियाँ!
अपने मन-मस्तिष्क की। @- राजेन्द्र सिंह कुँवर 'फरियादी'
#राजनेता
#टूटतासमाज
#तड़फतीइंसानियत
#कुर्सियाँ
#चालाकियाँ
विजयदशमी
ढाल तलवार नहीं, मन को उठाना है, भीतर जो रावण है, पहले उसे हराना है। दस मुख नहीं, दस विकार हम ढोते हैं, काम, क्रोध, लोभ में हर रोज खोते हैं। ...
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दूसरों की खुशियों पे दुःख जताने वालों, आसमां की तरह छत चाहाने वालों, क्यों तिनके तिनके पे, इस कदर जलते हो, जब जलना ही है त...
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मैं अपने ही घर में कैद हूँ मुझे अपनों से ही आजादी चाहिए रोती बिलखती सर पटकती रही मैं अब मेरी आवाज को एक आवाज चाह िए जी रही हूँ कड़वे घूँट...
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जन जन से मिल कर शहर से निकल कर आती है सहमी सी आवाज की तुम मुझे बचालो! मुझे बचालो ! मुझे बचालो ! हर एक पहाड़ से टकराकर ...




