Wednesday, September 26, 2018

चेतन मन

उड़ने दो मन की चेतना को,
अवसाद घुल जायेंगे सारे
घुटन भरे पथ पर कब तक
यूँ पल-पल जलते रहोगे प्यारे! @ - राजेन्द्र सिंह कुँवर 'फरियादी'

विजयदशमी

ढाल तलवार नहीं, मन को उठाना है, भीतर जो रावण है, पहले उसे हराना है। दस मुख नहीं, दस विकार हम ढोते हैं, काम, क्रोध, लोभ में हर रोज खोते हैं। ...