दिल ले गया था कोई कभी
अब तो जिस्म ही बेजान है !
सांसों को कोई देखता ही नहीं,
पत्थर भी कहने को यहाँ भगवान है !! .......रचना - राजेन्द्र सिंह कुँवर 'फरियादी'
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ढाल तलवार नहीं, मन को उठाना है, भीतर जो रावण है, पहले उसे हराना है। दस मुख नहीं, दस विकार हम ढोते हैं, काम, क्रोध, लोभ में हर रोज खोते हैं। ...