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Monday, October 6, 2014
Wednesday, October 1, 2014
''बढो आगे बढो''
बढो आगे बढो
रूको मत चलते चलो
पहिचानो उस सामर्थ्य को
जो हृदय और मस्तिष्क पर
चहलकदमी कर रही है ।
उतार दो उसे पथ पर
चढ़ने मत दो उसे रथ पर
स्वप्न संसार मे दौड़ने से
बोलो भला क्या मिलेगा । रचना - सर्वाधिकार, सुरक्षित राजेन्द्र सिंह कुँवर 'फरियादी
Sunday, September 28, 2014
कोई भीख लेता है कोई भीख मांगता है,
है भिखारी कौन ये कोई नहीं जनता,
कोई महलों से फैलाता है हाथ अपना,
बटोरते हैं कोई चौराह से सपना
फर्क बस रंग का है दोस्तों
कोई काले कलूटे फटे बस्त्र समेटे
कोई लहराता गेरुवा और खाकी भेष में
देखो सूरमाओं का छुपा चेहरा मेरे देश में
कोई भीख लेता है कोई भीख मांगता है,
है भिखारी कौन ये कोई नहीं जनता l -रचना @ राजेंद्र सिंह कंवर 'फरियादी'
है भिखारी कौन ये कोई नहीं जनता,
कोई महलों से फैलाता है हाथ अपना,
बटोरते हैं कोई चौराह से सपना
फर्क बस रंग का है दोस्तों
कोई काले कलूटे फटे बस्त्र समेटे
कोई लहराता गेरुवा और खाकी भेष में
देखो सूरमाओं का छुपा चेहरा मेरे देश में
कोई भीख लेता है कोई भीख मांगता है,
है भिखारी कौन ये कोई नहीं जनता l -रचना @ राजेंद्र सिंह कंवर 'फरियादी'
Wednesday, September 24, 2014
Monday, September 22, 2014
आओ रेत पे चलें
आओ रेत पे चलें
छाँव दे कुछ छाँ की अपनी
और धूप को हम
धूप से ही सुलगाते चले
आओ रेत पे चलें ।
छाँव दे कुछ छाँ की अपनी
और धूप को हम
धूप से ही सुलगाते चले
आओ रेत पे चलें ।
दल दल मे धसने का
एक एहसास है ये
तुफान से लड़ने का
पल भी खास है ये
आओ रेत पे चलें
एक एहसास है ये
तुफान से लड़ने का
पल भी खास है ये
आओ रेत पे चलें
भूल भी नही सकते
शूल भी नही थकते
पाँव की चुभन भी यूँ
रेत पर उभरती है
आओ रेत पर चलें
आओ रेत पर चलें । गीत - सर्वाधिकार सुरक्षित - राजेन्द्र सिंह कुँवर 'फरियादी'
शूल भी नही थकते
पाँव की चुभन भी यूँ
रेत पर उभरती है
आओ रेत पर चलें
आओ रेत पर चलें । गीत - सर्वाधिकार सुरक्षित - राजेन्द्र सिंह कुँवर 'फरियादी'
Tuesday, September 16, 2014
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किस्मत तुम्हारी भी नही किस्मत हमारी भी नही कितना चाहो बिखर जाओ पर रहोगे सदैव पंक्तियों में। किस्मत तुम्हारी भी नही किस्मत हमारी भी नह...