Sunday, October 5, 2014

''मेरी कलम''


अक्सर जब अवसादों से घिरा मै, 

रूकता हूँ एक चलते पथ पर, 

सिमट कर मेरी उँगलियों मे कलम,

खिँच ले जाती फिर नये सफर पर ।  - रचना

सर्वाधिकार, सुरक्षित राजेन्द्र सिंह कुँवर 'फरियादी

#कलम  #सफर 


गीली मिट्टी कभी आंखों में नव अंकुर सी रेखांकित कर देती  पल-पल को गीली मिट्टी! सपने पलने लगते अपने चलने लगते एहसास दिला जाती क्षण भर म...