Wednesday, October 1, 2014

''बढो आगे बढो''

बढो आगे बढो 

रूको मत चलते चलो 

पहिचानो उस सामर्थ्य को 

जो हृदय और मस्तिष्क पर 

चहलकदमी कर रही है ।

उतार दो उसे पथ पर 

चढ़ने मत दो उसे रथ पर 

स्वप्न संसार मे दौड़ने से 

बोलो भला क्या मिलेगा । रचना - सर्वाधिकार, सुरक्षित राजेन्द्र सिंह कुँवर 'फरियादी

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