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Thursday, January 17, 2013
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संघर्ष
धर्म-अधर्म की लड़ाई ले रही थी अंगड़ाई, दूर बैठे हंस रहे थे बाबू ले रहे थे जम्हाई। हौसले कभी टूटते नही जब मन से तैयारी होती,...
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मेरा देश कहाँ जा रहा है। आँखें खोल के देखो। सी यू ई टी ( CUET) के रूप में सरकार का यह बहुत बड़ा नकारा कदम साबित होने वाला है। इस निर्णय के र...
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दूसरों की खुशियों पे दुःख जताने वालों, आसमां की तरह छत चाहाने वालों, क्यों तिनके तिनके पे, इस कदर जलते हो, जब जलना ही है त...
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मैं अपने ही घर में कैद हूँ मुझे अपनों से ही आजादी चाहिए रोती बिलखती सर पटकती रही मैं अब मेरी आवाज को एक आवाज चाह िए जी रही हूँ कड़वे घूँट...
7 comments:
मर्मस्पर्शी ... अभिव्यक्ति
वाह पहली बार पढ़ा आपको बहुत अच्छा लगा.
बहुत सुन्दर...
बहुत खूब...
संजय जी, कैलाश जी एवं संध्या जी आप सब मित्रों का बहुत बहुत आभार
उम्र भर जी
मेरे आँगन मे आ
स्वागत तेरा ___
राजेन्द्र जी बेटी की बात करके आप हमेशा मुझे रुला देते हो - http://betibachaw.blogspot.in/
अभय जी बहुत बहुत धन्यवाद जी बेटी ही हम सब के जीवन का आधार है .................... इसके विन जीवन की कल्पना भी नै की जा सकती है और हम इसे अनदेखा कर रहे हैं
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