मुख्या पृष्ट

Tuesday, January 8, 2013

आंसुओं का क्या है

जब तन दुखी हो,

जब मन ख़ुशी हो,

निकल आते हैं ये,

इन आंसुओं का क्या !

रोकें भी तो कैंसे इनको,

कोसें भी तो कैंसे इनको,

बिन जुवान के बोलते देखो,

हर भाव को तोलते देखो,

तश्वीर ही बन लेते हैं,

सुख दुःख को गौर से देखो !

कारण जो भी हो आने का,

संकेत उम्दा है दर्शाने का,

जो न बदला कभी हवा से,

ये वो आंसू है अपना सा का ! - रचना --- राजेन्द्र सिंह कुँवर 'फरियादी'