Tuesday, August 2, 2011

ये आँखे तो दर्पण हैं

ये आँखे तो दर्पण हैं 
अधर पर जो न आ पाये
इन पर हर रोज़ उभरता है 
मन का मौसम कैंसा भी हो 
इन पर सब कुछ दिखता है 
ये आँखे तो .........ये आँखे तो ....
ये आँखे तो दर्पण हैं !
खुशियाँ भी फुहवारे बन कर 
गम आते हैं लेकर रिमझिम 
अक्स इन पर ऐंसे उभरते 
जैंसे मानो हो प्रतिबिंम्ब 
ये आँखे तो ......... ये आँखे तो ........
ये आँखे तो दर्पण हैं !.......रचना - राजेन्द्र सिंह कुँवर 'फरियादी'

Wednesday, July 27, 2011

फरियाद करूँ तो किससे


ये घटा तू बता मैं फरियाद करूँ तो किस से 
अपनों ने जब यूँ दर-दर भटकाया मुझको ,
तब फरियाद करूँ तो किस से !
मिटटी का बना खिलौना है,
मेरा हर सुख-दुःख तो यूँ ,
सब तो मुझको छोड़ चले,
आपना किसको मैं कह दूँ ,
ये घटा तू बता!  
किससे अब फरियाद करूँ तो किस से 
ये घटा तू बता मैं फरियाद करूँ तो किस से .........रचना-राजेन्द्र सिंह कुँवर 'फरियादी' 

Thursday, June 30, 2011

कही मैं दीपक न बन जाऊं

मैं तो अकेले जलता हूँ,
सारी महफ़िल देख रही है,
मैं खुद से ही डरता हूँ,
कहीं मैं दीपक न बन जाऊं !
मेरे जलन की रोशनी,
उनको खार सी चुभती है,
जख्म मुझे मिले मरघट में मैं हूँ,
भला उनकी आँख क्यों दुखती है,
मैं अपनी यादो में आपने,
अरमा डुबो कर जलाता हूँ,
भला कोई हृदय क्यों आकर,
मेरे मरघट पे मंडराता है !
मुझे डर है लोग इल्जाम देंगे,
कहीं मैं दीपक न बन जाऊं !........... रचना राजेन्द्र सिंह कुँवर 'फरियादी'












Saturday, June 11, 2011

हम इन्सान हैं


हम इन्सान हैं, इन्सान को इन्सान बनायें,
पड़े पत्थर राह में कौम के, उनको भी हटायें,
हम इन्सान हैं, इन्सान को इन्सान बनायें !
जमी के टुकड़े -टुकड़े करके,
हमने इसको बांटा है
छाया के लिए पेड़ लगाया,
उसमे उगता काँटा है !
हम इन्सान हैं, इन्सान को इन्सान बनायें,
अब तक बने हैं कितने खंडर 
सभी को ये दिखायेंगे !
हम इन्सान हैं, इन्सान को इन्सान बनायें,
कितनी सांसों ने कौम को विस्तार बनाया,
विज्ञानं ने कब इन्सान को जीना सिखाया,
कितनी सरहदों ने लहू से प्यास बुझाई 
इन्सान को इन्सान कब देता है दिखाई
हम इन्सान हैं, इन्सान को इन्सान बनायें,
पड़े पत्थर राह में कौम के, उनको भी हटायें, रचना -राजेन्द्र सिंह कुँवर 'फरियादी'

Friday, June 10, 2011

मेरी आरजू


तेरे रुपहले कुंजों की हंसी,
मैं एक बार देखना चाहता हूँ,
कर लेना नफरत जी भरकर,
मैं  राग  तुम्हारे  ही  गाता  हूँ !
सोचता हूँ तुम्हारी पलकों तले,
आंधियाँ   कैंसी   छा   पायी,
सावन कितना ही हो अँधियारा,
हरियाली उसने ही दिखलायी !
न नज़रों को जकडो यूँ परदे में,
दमन से यादें क्या मिटा पाओगी,
मांगे  सदी  तुम  से   कुर्वानी,
नाम  मेरा  क्या  दे   पाओगी!
है  मंजूर   तुम्हें  ये   सब  तो,
ध्यान कुछ इतना भी रख लेना,
जले चिता जब मेरे अरमानो की,
पलकों से आंसू न गिराने देना !...........रचना -राजेन्द्र सिंह कुँवर 'फरियादी'





तेरा मुस्कराना

मेरी नज़र यूँ उठती गिरती है,

हर  घटा  से   ये   पूछती   है,

हम   से   क्यों  दूर     हुआ ,

यूँ       तेरा       मुस्कराना !

क्या  भूल  हुई  है  हम  से,

क्यों  अधर  तेरे  यूँ  रूठ  गये,

निगाहों   के  हर  तीर  पे  मेरे,

क्यों  बेरहमी का ढाल लिए हो !

माना की  हम  से  थी  शिकायत  तुम्हें,

उमीदों  को  आपनी क्यों बेसहारा किये हो,

जख्म    मिले   हैं   जो   वफ़ा   के   हमें,

आंसू   उनके   खुद   भी   रो   रहे    हो !

न  दुनिया  हमने  देखी   थी कभी,

दर्द  से इसके हम भी अनजान थे,

कब तक हँसे रोयें महफिल में,

कुछ दिन के ही तो मेहमान हैं ! ..रचना -राजेन्द्र सिंह कुँवर 'फरियादी'

Wednesday, June 8, 2011

तुम दूर हुए तो याद पास आयी


तुम दूर हुए तो याद पास आयी,
क्या यही तोफा है दोस्ती का ?
सोचा न था तक़दीर एक दिन,
चल कर ये दिन भी दिखलाएगी,
हम तुम दूर होंगे याद पास आएगी !
तुम दूर हुए तो याद पास आयी,
क्या यही तोफा है दोस्ती का ?
वो तूफान हमने न कभी देखा था,
अरमानो की कश्ती को जो खेता है,
दुनिया का सायद यही तकाजा है,
यादें मिल जाती हैं यार विछुड़ जाता है,
तुम दूर हुए तो याद पास आयी,
क्या यही तोफा है दोस्ती का ?
तुम्हारे  यूँ   चले   जाने   से,
यादें   जो   आ   रही    हैं ,
दुवायें होंगी तुम्हारी ये मगर,
हमें  तो  ये  जला  रही  हैं !.....रचना --राजेन्द्र सिंह कुँवर 'फरियादी' 

सी यू ई टी (CUET) और बोर्ड परीक्षा का बोझ कब निकलेगा।

मेरा देश कहाँ जा रहा है। आँखें खोल के देखो।  सी यू ई टी ( CUET) के रूप में सरकार का यह बहुत बड़ा नकारा कदम साबित होने वाला है। इस निर्णय के र...