Tuesday, July 24, 2018

पतंगों को मारने की
साजिश रच रहे हैं,
रोशनी बढ़ाने की
ख्वाईश रख रहे हैं,
है माहौल बदलने का
तरीका ये कैंसा!
किसी के मातम में
आनंद रच रहे हैं। @ - राजेन्द्र सिंह कुँवर 'फरियादी'



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विजयदशमी

ढाल तलवार नहीं, मन को उठाना है, भीतर जो रावण है, पहले उसे हराना है। दस मुख नहीं, दस विकार हम ढोते हैं, काम, क्रोध, लोभ में हर रोज खोते हैं। ...