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Monday, October 15, 2012
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संघर्ष
धर्म-अधर्म की लड़ाई ले रही थी अंगड़ाई, दूर बैठे हंस रहे थे बाबू ले रहे थे जम्हाई। हौसले कभी टूटते नही जब मन से तैयारी होती,...
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मेरा देश कहाँ जा रहा है। आँखें खोल के देखो। सी यू ई टी ( CUET) के रूप में सरकार का यह बहुत बड़ा नकारा कदम साबित होने वाला है। इस निर्णय के र...
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दूसरों की खुशियों पे दुःख जताने वालों, आसमां की तरह छत चाहाने वालों, क्यों तिनके तिनके पे, इस कदर जलते हो, जब जलना ही है त...
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मैं अपने ही घर में कैद हूँ मुझे अपनों से ही आजादी चाहिए रोती बिलखती सर पटकती रही मैं अब मेरी आवाज को एक आवाज चाह िए जी रही हूँ कड़वे घूँट...

7 comments:
"जनसंख्या दिखती नहीं उतनी,
जितने हर शहर में घोटाले हैं !...."
कुछ बचता ही नही है कहने को |
तन की उजले मन के काले है
ये सब रावण,कंश,और शकुनी के साले है ||
इन दुष्टों का कुछ नहीं कर सकते राजेन्द्र जी
तो संसद के उस पार चलो !
theek bole.....
कटाक्ष पूर्ण अभिव्यक्ति ..
वास्तव में यह सोचनीय प्रश्न है लूटमार हर तरफ हाहाकार ..कैसा है जनतंत्र का ये त्यौहार....??
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♥~*~दीपावली की मंगलकामनाएं !~*~♥
ஜ●▬▬▬▬▬ஜ۩۞۩ஜ▬▬▬▬▬●ஜ
सरस्वती आशीष दें , गणपति दें वरदान
लक्ष्मी बरसाएं कृपा, मिले स्नेह सम्मान
**♥**♥**♥**●राजेन्द्र स्वर्णकार●**♥**♥**♥**
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nice
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