Monday, May 28, 2012

मेरी तीन रचनाये विनोद भगवत जी के हिंदी साप्ताहिक 'शव्द दूत' के प्रथम संस्करण में प्रकाशित  

1 comment:

Anonymous said...

Congratulations.

संघर्ष

धर्म-अधर्म की लड़ाई ले रही थी अंगड़ाई, दूर बैठे हंस रहे थे बाबू ले रहे थे जम्हाई। हौसले कभी टूटते नही जब मन से तैयारी होती,...