म्यर उत्तराखंड ग्रुप ने 25 दिसम्वर 2011 को अपने वार्षिकोत्सव के
अवसर पर अपनी स्मारिका `बुरांश'- का लोकार्पण किया,
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धर्म-अधर्म की लड़ाई ले रही थी अंगड़ाई, दूर बैठे हंस रहे थे बाबू ले रहे थे जम्हाई। हौसले कभी टूटते नही जब मन से तैयारी होती,...
2 comments:
Thanx for `बुरांश'
फूल चुनने के लिये मत कदमों को तुम रोको,
ये तो मग में ही तुम्हारे पग-पग पे खिलेंगे ।
आनन्द विश्वास
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