Tuesday, October 8, 2019

~ 'चलो चाँद देखें'~


चाँद को चाँद की तलाश
आसमाँ भी खुश है आज
बादल महक रहे हैं देख
छतों का हर्षोल्लास!

निगाहें झाँक रही हैं
खुद का विश्वास
महकती छवि आज
गर्वित हुआ एहसास।

श्रद्धा मन मे उमड़ती
कर अलौकिक श्रृंगार
चाँद भी मदहोश हुआ
पा कर चाँद का दीदार! @ - राजेन्द्र सिंह कुँवर 'फरियादी'

#करवाचौथ
#दीदार_चाँद_का

No comments:

संघर्ष

धर्म-अधर्म की लड़ाई ले रही थी अंगड़ाई, दूर बैठे हंस रहे थे बाबू ले रहे थे जम्हाई। हौसले कभी टूटते नही जब मन से तैयारी होती,...