Thursday, June 20, 2019

मुठ्ठी भर यादें

तेज कदमों की रफ्तार
समय के साथ दौड़ती
जिंदगी क्या खोज रही
मुट्ठी भर यादें लिए।

सुख भी दुःख भी
पल-पल बदल रहा
फिर भी मुसाफिर सी
भटकती जिंदगी
मुट्ठी भर यादें लिए। @- राजेन्द्र सिंह कुँवर 'फरियादी'

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