Wednesday, June 19, 2019

छू लेता हूँ

छू लेता हूँ कभी कभी
इन शब्दों के बंधन को
समेट ने की कोशिश भर है
बस मन-मंथन के क्रंदन को।

छू लेता हूँ!

कहानियाँ समेटना
बस की न मेरी बात है
औकात है हर शब्द की
हमारी क्या बिसात है।  @ - राजेन्द्र सिंह कुँवर 'फरियादी'





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