Wednesday, July 2, 2014

मेरे कदमो की आहाट से अब उनको डर लगने लगा,
जो कभी मेरे इन्तजार में आँखें बिछाए रहते थे l 
वही अब दिन-रात बेचैन रहते हैं अपने सपनों से ,
जो कभी छुपाये अपने ख्वाबों में हमें रहते थे l @ राजेंद्र सिंह कुँवर 'फरियादी' 

ह्ववे जालू रे ह्ववे जालू रे ह्ववे जालू! तुम ज्योत जगा विकासकी उजालु ह्ववे जालू! पुंगड़ा बांजा राखा पैंसा वाला सैर भाग नेतौं का फैथर स...