मुख्या पृष्ट

Saturday, June 21, 2014

मैं तो घर ही ढूढने निकला था शहर में पर,

कई माकन मिले हैं मेरे साथियों के सफ़र में,

आँगन भी कुछ यूँ भरे थे गाड़ियों से,

और सिमटी हुई एक ओर मेरी खटिया पड़ी थी !! @ राजेंद्र सिंह कुँवर 'फरियादी'