Friday, April 18, 2014

उडती आंधियां अब इंसानियत सिखा रही हैं ,

फैला के पंख खुद को आसमा बता रही हैं l @ राजेन्द्र सिंह कुँवर 'फरियादी' 

ह्ववे जालू रे ह्ववे जालू रे ह्ववे जालू! तुम ज्योत जगा विकासकी उजालु ह्ववे जालू! पुंगड़ा बांजा राखा पैंसा वाला सैर भाग नेतौं का फैथर स...