मुख्या पृष्ट

Wednesday, September 19, 2012

ये जीवन कुछ ऐंसा भी है


विन दर्पण में देखे हम,

जीवन की मांग भरते हैं,

सुइयां घडी की पकड़ के,

सोते हैं और जागते हैं !

यादों में लेके जो चलते हैं हम,

वो कहाँ राहों में हमें मिलते हैं !!!!!!!!! रचना - राजेन्द्र सिंह कुँवर 'फरियादी'