Tuesday, November 14, 2017

आँख्यों मा छळकदू आँसू 
पराण निरास्यूँ रै ग्याई
रट लगाईं रै उत्तराखंड की 
त्वी बतौ बणी उत्तराखंड तिन क्या पाई। 
कुठारी भौर्यालि उँ लोगून् 
चमकदा दरवार देख्याला
तुम रोंदाँ रयाँ सदानी इनि
कै दिन नींद मा तुम भी सेजाला।
भोळ औण नि फिर यू दिन
सुखी जाला आँसू रोंण नि तिन
गुठयारों मा बांदर रैला
धुरपालियों मा कंडाळी पैला।
हर्युं भर्युं गौं ह्वैजालू
फिर निवाति कोण्यों पर कन कै सेल्या
सुपिन्यों कु उत्तराखंड इनी पैला।
@ - राजेन्द्र सिंह कुँवर 'फरियादी'

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