Saturday, May 3, 2014

संकोच तेरी आँखों में सब टकटकी लगाये पढ़ते हैं,

तूफ़ान ह्रदय का दीखता जिसे वो हम ही अकेले हैं @राजेन्द्र सिंह कुँवर 'फरियादी'


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संघर्ष

धर्म-अधर्म की लड़ाई ले रही थी अंगड़ाई, दूर बैठे हंस रहे थे बाबू ले रहे थे जम्हाई। हौसले कभी टूटते नही जब मन से तैयारी होती,...