Wednesday, March 6, 2013

नेता


मुझ को भी नेता बनना है

कोई बता दे मुझको,

कहाँ, कब, क्या पढना है,

मैं भी अरमान सजाये बैठा,

मुझ को भी नेता बनना है !

झूट बोलकर ताली बजवाना,

मन को मेरे भी भाता है,

निकलूं जब चौराहे पर,

राही देख मुझे घबराता है ! 

भरी सभा में शोर मचाना,

ये तो पहले से ही आता है !

दो अपनों को कैंसे लड़ना,

ये कहाँ सिखा जाता है ! 

पहन कर खादी सच है क्या .?

आदमी नेता बनजाता है !  - रचना – राजेन्द्र सिंह कुँवर ‘फरियादी’ 



शिक्षक केवल डिग्रियाँ लेने से ही नही बना जाता हर इंसान के अंदर कुछ न कुछ प्रतिभा होती है वही उसका शिक्षक बनने की ओर रास्ता खोलता है। कृपया ...