Sunday, May 15, 2011

पल भर की नजर



एक छोटी सी कहानी है तेरे यादों की

जो निशा की तरह आती है


यूँ छुप कर छाया तेरा

घटा बन कर लहराता है

मगर यादों का साया है जिंदगी

जो फूलो की तरह तडफायेगी

दे कर एक झलक हंसी की

जिंदगी  भर रुलाएगी

यूँ गुजरती जिंदगी की एक निगाह

ढलती शाम के किनारे तक पहुँची

खुशियों के लिवास से ढक लेंगे हर जख्म 

हर याद पे एक जख्म देती है जिंदगी  ....................... रचना-राजेन्द्र सिंह कुँवर 'फरियादी' 

आँखि खोल द्या बक्त ऐगी देख्णो आँखि खोल द्या बक्त ऐगी बोनो  भट्याकी बोल द्या अदलि बदलि देख्ला कब तैं अब त बटोल द्या! बक्त ऐगी देख्णो आ...