Monday, November 17, 2014

तुम तो फिर,
चले आए सूरज ! 
उसी पथ पर,
जहाँ तुमने
बिखेरा अंधेरा । 
संभाल कर,
तलाश कर,
लाएँ हो
फिर वही सबेरा ।
तुम तो फिर,
चले आए सूरज ! - रचना सर्वाधिकार, सुरक्षित - राजेन्द्र सिंह कुँवर 'फरियादी'



आँखि खोल द्या बक्त ऐगी देख्णो आँखि खोल द्या बक्त ऐगी बोनो  भट्याकी बोल द्या अदलि बदलि देख्ला कब तैं अब त बटोल द्या! बक्त ऐगी देख्णो आ...